क्रिप्टो निवेश के नाम पर कंपनी कर्मचारी से 17 लाख की ठगी, निवेश के बदले दिखाया लाभ, व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए जालसाजी

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक कंपनी कर्मचारी से क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए 17 लाख रुपये की ठगी हो गई। ठगों ने फर्जी मुनाफा दिखाकर रकम ट्रांसफर करवाई। साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी से क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर करीब 17 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिए पीड़ित को फंसाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। मामले में साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


व्हाट्सऐप मैसेज से शुरू हुआ पूरा खेल
पीड़ित जसविंदर सिंह, जो स्टेलर जीवन सोसाइटी में रहते हैं और एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, उन्होंने पुलिस को बताया कि पिछले साल 23 जून को उनके व्हाट्सऐप पर एक मैसेज आया था। इसमें दावा किया गया कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने पर कम समय में भारी मुनाफा मिलेगा। जब उन्होंने रुचि दिखाई तो उन्हें एक बड़े व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जहां पहले से 200 से अधिक लोग जुड़े हुए थे।


ग्रुप में दिखाया गया झांसा और फर्जी मुनाफा
ग्रुप में मौजूद लोग लगातार निवेश के स्क्रीनशॉट और मुनाफे की फर्जी जानकारी साझा कर रहे थे। ठगों ने भरोसा जीतने के लिए बताया कि निवेश पर तीन गुना तक रिटर्न मिल सकता है। शुरुआत में छोटे निवेश पर पीड़ित को मुनाफा भी दिखाया गया, जिससे उनका भरोसा और मजबूत हो गया। इसके बाद वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराकर उन्हें लगातार निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।


17 लाख रुपये ट्रांसफर, फिर अकाउंट ब्लॉक
धीरे-धीरे पीड़ित ने 20 अगस्त तक करीब 17 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। वेबसाइट पर उन्हें निवेश की रकम कई गुना बढ़ी हुई दिखाई दे रही थी। लेकिन जब उन्होंने पैसा निकालने की कोशिश की तो ठगों ने अलग-अलग टैक्स और चार्ज जमा करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्हें ग्रुप से भी बाहर कर दिया गया।


साइबर थाना पुलिस ने शुरू की जांच
पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की ट्रेसिंग की जा रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके।

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