ग्रेटर नोएडा में ई-रजिस्ट्री के खिलाफ अधिवक्ताओं का आंदोलन तेज, पैदल मार्च रोका, 9वें दिन भी हड़ताल जारी

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ग्रेटर नोएडा में ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं की हड़ताल नौवें दिन भी जारी रही। पैदल मार्च को पुलिस ने रोक दिया। वकीलों का कहना है कि नई व्यवस्था से रोजगार प्रभावित होगा, जबकि प्रशासन ने उनकी मांगों पर विचार का आश्वासन दिया है।

ग्रेटर नोएडा में प्रदेश सरकार की ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं और डीड राइटरों की हड़ताल लगातार नौवें दिन भी जारी रही। शुक्रवार को स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब सेक्टर गामा-1 स्थित रजिस्ट्री कार्यालय से परी चौक तक निकाले जाने वाले पैदल मार्च को पुलिस ने बीच रास्ते में रोक दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे और उन्होंने विरोध प्रदर्शन जारी रखा।


हड़ताल के नौवें दिन भी नहीं टूटा आंदोलन
अधिवक्ताओं का कहना है कि ई-रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने के बाद उनके रोजगार पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। उनका आरोप है कि इस प्रणाली से हजारों डीड राइटर, अधिवक्ता और उनसे जुड़े कर्मचारी बेरोजगारी की कगार पर पहुंच जाएंगे। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पिछले नौ दिनों से लगातार धरना चल रहा है, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने उनकी समस्याएं सुनने की कोशिश नहीं की है। इससे वकीलों में नाराजगी और बढ़ गई है।


पैदल मार्च रोके जाने पर बढ़ा तनाव
शुक्रवार को जब अधिवक्ता पैदल मार्च निकालने के लिए आगे बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद मौके पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बनी, हालांकि पुलिस ने हालात को नियंत्रित कर लिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन उनकी आवाज को दबाया जा रहा है।


रजिस्ट्रियों पर असर, राजस्व नुकसान का दावा
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, गामा-1 रजिस्ट्री कार्यालय में प्रतिदिन लगभग 3,000 रजिस्ट्रियां होती हैं, जबकि पूरे जिले में यह संख्या 7 से 8 हजार तक पहुंचती है। हड़ताल के कारण हजारों रजिस्ट्रियां प्रभावित हुई हैं, जिससे राज्य सरकार को करीब 70 से 80 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।


प्रशासन ने लिया ज्ञापन, समाधान का आश्वासन
पुलिस द्वारा मार्च रोके जाने के बाद मौके पर पहुंचे एडीएम ने अधिवक्ताओं से ज्ञापन लिया और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। हालांकि अधिवक्ताओं ने साफ कहा है कि जब तक सरकार ई-रजिस्ट्री व्यवस्था पर पुनर्विचार नहीं करती और उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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