ग्रेटर नोएडा में खाद्य विभाग ने नष्ट कराया 300 किलो मिलावटी पनीर, 5 नमूने जांच को भेजे

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ग्रेटर नोएडा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 300 किलो संदिग्ध पनीर नष्ट कराया। दूध और पनीर के पांच नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं, रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

ग्रेटर नोएडा। खाद्य सुरक्षा विभाग ने शुक्रवार को मिलावट के शक में करीब 300 किलो पनीर नष्ट करा दिया। कार्रवाई नोएडा और ग्रेटर नोएडा में चल रहे विशेष अभियान का हिस्सा रही, जिसमें दूध और पनीर के नमूने भी उठाए गए। विभागीय टीम ने अलग-अलग प्रतिष्ठानों पर जांच की और जिन जगहों पर पनीर की गुणवत्ता संदिग्ध मिली, वहां मौके पर ही निस्तारण कराया गया। सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा माल बाजार में खपाने की तैयारी में था। विभाग ने पांच नमूने लैब भेजे हैं, ताकि यह साफ हो सके कि पनीर मानकों पर खरा उतरता था या नहीं। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

छापे में क्या मिला

जानकारी के मुताबिक, खाद्य सुरक्षा टीम ने ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में एक साथ दबिश दी। इस दौरान करीब 300 किलो पनीर संदिग्ध हालत में मिला, जिसे टीम ने मौके पर ही नष्ट कराया। कुछ हिस्से में पनीर की गंध, रंग और बनावट को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि दूध और पनीर के कुल पांच सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। टीम ने जिस तरह की कार्रवाई की है, उससे साफ है कि विभाग अब मिलावटी डेयरी उत्पादों पर सीधा वार कर रहा है। स्थानीय बाजारों में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी शिकायतें आती रही हैं, इसलिए यह अभियान और सख्त किया गया है।

मिलावट पर क्यों कसा जा रहा शिकंजा

खाद्य सुरक्षा विभाग की इस कार्रवाई को सिर्फ एक छापे के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे बड़े अभियान की कड़ी माना जा रहा है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा बेल्ट में डेयरी उत्पादों की खपत काफी ज्यादा है और ऐसे में मिलावटी पनीर सीधे आम लोगों की थाली तक पहुंचने का खतरा बनता है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच का मकसद सिर्फ खराब माल पकड़ना नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की जड़ तक पहुंचना भी है। इसी वजह से सैंपलिंग पर जोर दिया जा रहा है। अगर लैब रिपोर्ट में गड़बड़ी साबित होती है तो संबंधित कारोबारियों पर कार्रवाई और सख्त हो सकती है।

आगे क्या होगा

अब पूरा मामला लैब रिपोर्ट पर टिक गया है। खाद्य विभाग ने सैंपल सुरक्षित करा दिए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि पनीर में किस तरह की मिलावट थी और जिम्मेदार कौन है। विभाग के अधिकारी मानते हैं कि इस तरह की कार्रवाइयों से कारोबारियों पर दबाव बनेगा और नकली या घटिया खाद्य पदार्थों की सप्लाई पर रोक लगेगी। दूसरी तरफ, उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला चेतावनी की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि दूध और पनीर जैसे रोजमर्रा के उत्पादों में गड़बड़ी सीधे सेहत पर असर डालती है। फिलहाल विभाग ने अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं और आने वाले दिनों में और छापेमारी की संभावना जताई जा रही है।

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