राम मंदिर दान अनियमितता मामले में एसआईटी ने मुख्यमंत्री को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट
- Babli Ansari
- 22 Jun, 2026
लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी। सूत्रों के मुताबिक, तीन सदस्यीय एसआईटी ने करीब छह दिनों में लगभग 60 घंटे की जांच के बाद यह रिपोर्ट तैयार की। मामला मंदिर में चढ़ावे की गिनती, नकदी और आभूषणों को संभालने की व्यवस्था और बैंक तक रकम भेजने की प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है। अभी यह सिर्फ शुरुआती निष्कर्ष हैं, लेकिन रिपोर्ट ने प्रबंधन तंत्र पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच में किन खामियों की ओर इशारा
जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट में दान पेटियों से नकदी, सोना और चांदी की निकासी, उन्हें गिनती केंद्र तक ले जाने और वहां गिनती कराने की प्रक्रिया में प्रणालीगत कमियों का जिक्र है। जांच दल ने यह भी पाया कि नकदी को बैंक तक पहुंचाने की मौजूदा व्यवस्था में निगरानी कमजोर थी। निर्धारित नियमों के अनुसार कैश को डबल-लॉक सिस्टम में रखा जाना चाहिए, जिसकी दो चाबियां अलग-अलग लोगों के पास हों, लेकिन जांच में इस प्रोटोकॉल के सही ढंग से पालन न होने की बात सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट ने मंदिर ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों, एसबीआई कर्मियों और कैश-काउंटिंग में लगी निजी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर फिलहाल सीधा आरोप नहीं
प्रारंभिक रिपोर्ट की एक अहम बात यह है कि इसमें मंदिर ट्रस्ट के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है। हालांकि, जांच एजेंसी ने कुछ कर्मचारियों और व्यवस्था से जुड़े लोगों पर संदेह जताया है। जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी जो रिपोर्ट दी गई है, वह अंतिम निष्कर्ष नहीं है। मुख्यमंत्री ने पहले ही साफ संदेश दिया था कि दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और एसआईटी को जल्द से जल्द पूरी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद अब पूरी नजर अगले चरण की जांच पर है, जिसमें सामने आए तथ्यों की परत-दर-परत पड़ताल होगी।
अब आगे क्या होगा, निगाहें अंतिम रिपोर्ट पर
एसआईटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिन के भीतर सौंपनी है। माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट में दान प्रबंधन की खामियों, जिम्मेदारी तय करने और संभावित कार्रवाई की दिशा अधिक स्पष्ट होगी। अयोध्या में यह मामला केवल प्रशासनिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मंदिर व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर भी बड़ी बहस छेड़ चुका है। श्रद्धालुओं और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बीच भी इस रिपोर्ट को लेकर बेचैनी बनी हुई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतिम रिपोर्ट में किन नामों, किन प्रक्रियाओं और किन स्तरों की जवाबदेही तय होती है।
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