यूपी का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर ग्रेटर नोएडा में बनेगा, 900 करोड़ की परियोजना से बनेगा फ्लाईओवर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा ग्रेनो वेस्ट
- Shiv Kumar
- 12 Jul, 2026
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। शाहबेरी में उत्तर प्रदेश का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर बनाने की योजना तैयार की गई है। प्रस्तावित फ्लाईओवर 130 मीटर रोड को शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के जरिए सीधे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इससे दिल्ली और गाजियाबाद की ओर जाने वाले वाहनों को लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा और तिगरी चौक पर लगने वाले जाम से भी काफी राहत मिलने की उम्मीद है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
छह लेन का होगा फ्लाईओवर, दोनों स्तर पर चलेगा वन-वे ट्रैफिक
प्रस्तावित फ्लाईओवर की लंबाई करीब 1.4 किलोमीटर होगी। इसकी सबसे खास बात यह होगी कि यह दो मंजिला (डबल डेकर) होगा। ऊपरी और निचले दोनों हिस्सों में तीन-तीन लेन बनाई जाएंगी, जिन पर वन-वे ट्रैफिक संचालित किया जाएगा। इस तरह कुल छह लेन उपलब्ध होंगी। शुरुआत में चार लेन का फ्लाईओवर प्रस्तावित था, लेकिन सीमित जगह के कारण डिजाइन में बदलाव करना पड़ा और डबल डेकर मॉडल को अंतिम रूप दिया गया।
कम जगह मिलने पर बदली योजना, NHAI को भेजी गई DPR की मांग
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जीएम (प्रोजेक्ट) ए.के. सिंह के मुताबिक, सामान्य चार लेन फ्लाईओवर के लिए करीब 15 मीटर चौड़ाई की जरूरत थी, जबकि शाहबेरी में सिर्फ 14 मीटर जगह उपलब्ध है। इसी वजह से NHAI के साथ कई दौर की चर्चा के बाद विशेषज्ञों ने डबल डेकर फ्लाईओवर का विकल्प सुझाया। प्राधिकरण ने इसका प्रेजेंटेशन NHAI को सौंप दिया है। अब राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) मांगी है, जिसके आधार पर निर्माण को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
यू-शेप पिलर तकनीक से होगा निर्माण, स्थानीय लोगों को भी मिलेगा फायदा
फ्लाईओवर का निर्माण यू-शेप पिलर तकनीक से किया जाएगा, ताकि नीचे की मौजूदा सड़क चालू रहे और आसपास की सोसायटियों, बाजारों और गांवों के लोगों को सर्विस रोड की सुविधा मिलती रहे। अभी ग्रेनो वेस्ट से गाजियाबाद जाने वाले अधिकांश वाहन तिगरी चौक से गुजरते हैं, जहां रोजाना लंबा जाम लगता है। नया फ्लाईओवर बनने के बाद दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक का दबाव भी काफी घट जाएगा।
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