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नोएडा के गांवों में नक्शा नीति सिर्फ कागजों तक सीमित, अवैध पीजी और बहुमंजिला इमारतों पर उठे सवाल, सस्ता किराया होने से बढ़ी भीड़

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नोएडा के मामूरा गांव में रिहायशी इमारत में आग लगने के बाद अवैध पीजी और अनियंत्रित निर्माण पर सवाल उठे हैं। गांवों में बिना सुरक्षा इंतजामों के चल रहे पीजी, बहुमंजिला इमारतों और नक्शा नीति के कमजोर क्रियान्वयन ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

नोएडा के मामूरा गांव में रिहायशी इमारत में लगी आग ने शहर के गांवों में तेजी से बढ़ रहे अवैध पीजी कारोबार और अनियंत्रित निर्माण व्यवस्था की पोल खोल दी है। जिस भवन में आग लगी थी, उसे भवन मालिक ने लीज पर दिया हुआ था। लीज लेने वाले व्यक्ति ने वहां पीजी और फैमिली रूम संचालित कर रखे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि पीजी का कोई पंजीकरण नहीं था और न ही भवन में आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे। बताया जा रहा है कि एक कमरे का किराया करीब 12 हजार रुपये तक लिया जा रहा था। मामूरा की यह घटना अब नोएडा के उन तमाम गांवों पर सवाल खड़े कर रही है, जहां इसी तरह बहुमंजिला इमारतों में बिना मानकों के पीजी और किराये के कमरे संचालित किए जा रहे हैं।


लीज पर देकर चलाए जा रहे पीजी, सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी

मामूरा ही नहीं, बल्कि नोएडा के कई गांवों में रिहायशी भवनों को लीज पर देकर पीजी और किराये के कमरों का कारोबार तेजी से बढ़ा है। कई इमारतों में 50 से 100 तक कमरे बनाए गए हैं। अधिक कमाई के चक्कर में भवनों में वेंटिलेशन, इमरजेंसी एग्जिट, फायर सेफ्टी सिस्टम और पार्किंग जैसी जरूरी सुविधाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। आईटी कंपनियों, फैक्ट्रियों और निजी संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारी और छात्र कम किराये के कारण इन इलाकों में रहना पसंद करते हैं। मामूरा, सर्फाबाद, बरौला, हरौला, सलारपुर, भंगेल और नवादा जैसे गांवों में हजारों लोग पीजी में रहते हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो पाई है। कई जगहों पर गलियां इतनी संकरी हैं कि आग या अन्य आपात स्थिति में दमकल वाहनों का पहुंचना भी चुनौती बन जाता है।


नक्शा नीति बनी, लेकिन गांवों में नहीं रुका अवैध निर्माण

नोएडा प्राधिकरण ने गांवों में बढ़ते अनियंत्रित निर्माण को रोकने के लिए वर्षों पहले नक्शा नीति लागू की थी। इसके तहत आबादी क्षेत्र में भी भवन निर्माण से पहले नक्शा पास कराना और तय मानकों का पालन करना जरूरी किया गया था। हालांकि जमीन पर इस नीति का प्रभावी पालन नहीं हो सका। नतीजा यह रहा कि गांवों में बिना अनुमति के बहुमंजिला इमारतों का निर्माण लगातार बढ़ता गया। कई भवनों में जरूरत से ज्यादा कमरे बनाकर उन्हें पीजी में तब्दील कर दिया गया। प्राधिकरण और प्रशासन की निगरानी कमजोर होने से यह कारोबार लगातार फैलता चला गया।


मामूरा हादसे के बाद कार्रवाई की उम्मीद

लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अवैध पीजी, बेसमेंट में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद जिला प्रशासन ने नोएडा प्राधिकरण को भी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा था। हालांकि अब तक अभियान मुख्य रूप से कोचिंग सेंटरों तक सीमित रहा और गांवों में संचालित अवैध पीजी पर व्यापक कार्रवाई नहीं हो सकी।

मामूरा की घटना ने एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब जरूरत है कि गांवों में चल रहे पीजी, लीज पर दी गई बहुमंजिला इमारतों और उनकी सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक सर्वे कराया जाए। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे हादसों का खतरा बना रह सकता है।

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