ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ किसानों का हल्ला बोल, 100 गांवों के किसान महापंचायत में जुटे, मांगों को लेकर प्रदर्शन

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ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के खिलाफ करीब 100 गांवों के किसान महापंचायत में जुटे। किसानों ने चार प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड, आबादियों की लीजबैक और 2013 भूमि अधिग्रहण कानून लागू करने की मांग उठाई। कई किसान संगठन और राजनीतिक दल भी समर्थन में पहुंचे।

ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के खिलाफ किसानों ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। प्राधिकरण क्षेत्र के करीब 100 गांवों के किसान अपनी मांगों को लेकर महापंचायत में जुटे हैं। किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसान संगठनों के साथ ही कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी महापंचायत में पहुंचकर किसानों के समर्थन में खड़े नजर आए। किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।


चार प्रतिशत आबादी भूखंड और लीजबैक की मांग

महापंचायत में किसानों ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। किसानों की सबसे बड़ी मांग चार प्रतिशत विकसित आबादी भूखंड दिए जाने की है। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद किसानों को उनके हक के अनुसार सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके अलावा आबादी क्षेत्रों की लीजबैक प्रक्रिया पूरी करने की मांग भी किसानों ने उठाई है। किसानों का आरोप है कि कई मामलों में लंबे समय से लीजबैक की कार्रवाई लंबित है, जिससे ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि नए नियमों के तहत किसानों को उचित अधिकार और मुआवजा मिलना चाहिए। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


कई संगठनों और राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन

किसानों की महापंचायत में किसान सभा, किसान एकता संघ और किसान परिषद समेत कई संगठनों के पदाधिकारी पहुंचे। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं ने भी किसानों के आंदोलन का समर्थन किया। बड़ी संख्या में वकील भी किसानों के पक्ष में महापंचायत में शामिल हुए। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। अधिकारियों की टीम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन की कोशिश है कि महापंचायत शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने।


किसानों ने उठाई अधिकारों की आवाज

किसानों का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए उनकी जमीन ली गई, लेकिन बदले में मिलने वाले अधिकार और सुविधाओं को लेकर उन्हें लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांगें नई नहीं हैं और वह लंबे समय से प्राधिकरण से समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। अब किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज को मजबूती से उठाने का फैसला किया है।

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