नोएडा को मिलेगा नया एलिवेटेड रोड, MP-1 पर 700 करोड़ की परियोजना से DND और सेक्टर-62 के बीच जाम से राहत

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नोएडा में एमपी-1 रोड पर सेक्टर-3 से सेक्टर-60 तक 5.43 किलोमीटर लंबी छह लेन एलिवेटेड रोड बनाई जाएगी। आईआईटी रुड़की इसकी डीपीआर तैयार करेगा। करीब 700 करोड़ रुपये की इस परियोजना से डीएनडी से सेक्टर-62 तक का सफर मात्र 10 मिनट में पूरा हो सकेगा।

शहर में बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने एमपी-1 रोड पर प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह एलिवेटेड रोड सेक्टर-3 से शुरू होकर सेक्टर-60 तक बनाई जाएगी, जहां इसे एमपी-2 रोड से जोड़ा जाएगा। परियोजना की लंबाई बढ़ाकर करीब 5.43 किलोमीटर कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का डिजाइन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की तैयार करेगा। इसके लिए नोएडा प्राधिकरण ने आईआईटी रुड़की को कंसल्टेंसी मद में एक करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि एलिवेटेड रोड बनने के बाद दिल्ली से नोएडा के आईटी और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक तेज और आसान हो जाएगी। साथ ही डीएनडी से सेक्टर-62 तक की यात्रा करीब 10 मिनट में पूरी की जा सकेगी।


सेक्टर-3 से सेक्टर-60 तक बनेगा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड एमपी-1 मार्ग पर सेक्टर-3, सेक्टर-10, सेक्टर-12/22 टी-प्वाइंट, सेक्टर-57 होते हुए सेक्टर-60 तक बनाई जाएगी। लगभग 5.43 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह लेन में विकसित किया जाएगा। यह मार्ग नोएडा के प्रमुख औद्योगिक, व्यावसायिक और आईटी सेक्टरों को सीधे जोड़ने का काम करेगा। परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली, नोएडा, खोड़ा और इंदिरापुरम की ओर जाने वाले वाहनों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम होगा और पीक आवर में लगने वाले जाम में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।


90 डिग्री मोड़ के लिए बनेगा विशेष डिजाइन, एक महीने में आएगी डीपीआर

परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा सेक्टर-12/22 टी-प्वाइंट माना जा रहा है, जहां सड़क को मोड़ने की आवश्यकता होगी। यहां सीधे मोड़ देने पर लगभग 90 डिग्री का तीखा मोड़ बन सकता है, इसलिए आईआईटी रुड़की विशेष ज्यामितीय डिजाइन तैयार करेगा ताकि पहले से घुमाव देकर वाहनों की आवाजाही सुरक्षित और सुचारु बनी रहे। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, आईआईटी रुड़की एक महीने के भीतर फिजिबिलिटी स्टडी पूरी कर डीपीआर और अंतिम डिजाइन तैयार करेगा। डीपीआर के बाद परियोजना की वास्तविक लागत तय होगी। फिलहाल इस एलिवेटेड रोड के निर्माण पर लगभग 700 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।


पीक आवर के ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत

रजनीगंधा चौराहे से सेक्टर-12/22-56 तिराहे तक सुबह और शाम के समय भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। कार्यालय समय में वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं और लोगों को घंटों तक जाम में फंसना पड़ता है। इस मार्ग से दिल्ली, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास की कई आवासीय कॉलोनियों का ट्रैफिक गुजरता है। अधिकारियों का कहना है कि एलिवेटेड रोड बनने के बाद इस पूरे कॉरिडोर पर ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा, जिससे लोगों को तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।

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