नोएडा फ्लडप्लेन में अवैध फार्महाउस पर बुलडोजर एक्शन, जानिए अब तक कितनी जमीन हुई खाली
- Shiv Kumar
- 11 Aug, 2026
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के डूब क्षेत्र यानी फ्लडप्लेन में अवैध निर्माण के खिलाफ प्राधिकरण की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है। हाल के अभियान में यमुना और हिंडन नदी के आसपास बनाए गए अवैध निर्माणों को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में फरवरी में तीन दिनों तक चले अभियान के दौरान करीब 37 हजार वर्गमीटर क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाया गया था। वहीं नोएडा में भी डूब क्षेत्र में बने फार्महाउस और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की गई है। जुलाई के अंत में कोंडली बांगर और सेक्टर-14ए क्षेत्र में सात अवैध फार्महाउस ध्वस्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले प्राधिकरण ने यमुना-हिंडन डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण खाली करने के लिए नोटिस भी जारी किए थे। प्रशासन का कहना है कि नदी के डूब क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण से बारिश और बाढ़ के दौरान खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में अभियान का उद्देश्य सिर्फ निर्माण हटाना नहीं, बल्कि जल निकासी और नदी के प्राकृतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखना भी है।
फ्लडप्लेन में अतिक्रमण की पूरी कहानी
यमुना और हिंडन नदी के आसपास का डूब क्षेत्र बारिश और बाढ़ के समय पानी के फैलाव के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बावजूद कई जगहों पर समय के साथ फार्महाउस, चारदीवारी और दूसरे निर्माण खड़े हो गए। अधिकारियों के मुताबिक ऐसे क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण नियमों का उल्लंघन करते हैं। ग्रेटर नोएडा में फरवरी में भानौता, रोहिल्लापुर, हैबतपुर और छपरौला खुर्द समेत कई क्षेत्रों में कार्रवाई हुई थी। तीन दिन के अभियान में करीब 37 हजार वर्गमीटर क्षेत्र खाली कराया गया।
अवैध फार्महाउस कब और कैसे बने
डूब क्षेत्र में जमीन की उपलब्धता और शहर के आसपास फार्महाउस की मांग बढ़ने के साथ कई स्थानों पर अनधिकृत निर्माण सामने आए। प्राधिकरण और प्रशासन का रुख है कि बिना अनुमति या प्रतिबंधित क्षेत्र में किया गया निर्माण वैध नहीं माना जा सकता। जून में नोएडा प्राधिकरण ने यमुना और हिंडन के डूब क्षेत्र में अवैध घरों और फार्महाउस को हटाने की तैयारी की थी। प्रभावित स्थानों पर नोटिस देकर लोगों को निर्माण खाली करने का समय भी दिया गया था।
कार्रवाई की वजह
फ्लडप्लेन में निर्माण को लेकर सबसे बड़ी चिंता बाढ़ और जल निकासी की है। नदी के प्राकृतिक बहाव और पानी के फैलाव वाले क्षेत्र में निर्माण होने से बारिश के दौरान पानी के रास्ते प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से प्रशासन ऐसे निर्माणों को हटाने पर जोर दे रहा है। सिंचाई विभाग ने भी चेतावनी दी थी कि हिंडन के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण करने वालों को बाढ़ से होने वाले नुकसान के लिए सरकारी मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
प्राधिकरण की ध्वस्तीकरण कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण की टीमें पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचती हैं और चिन्हित अवैध निर्माण को हटाती हैं। जुलाई के अंत में कोंडली बांगर और सेक्टर-14ए क्षेत्र में सात फार्महाउस पर बुलडोजर चलाया गया था। इससे पहले भी अलग-अलग इलाकों में चारदीवारी, निर्माणाधीन मकान और अन्य अवैध ढांचों को हटाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई चिन्हित अतिक्रमण और लागू नियमों के आधार पर की जा रही है।
कितने फार्महाउस तोड़े गए
हाल की कार्रवाई में कोंडली बांगर और सेक्टर-14ए क्षेत्र में सात अवैध फार्महाउस ध्वस्त किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि पूरे नोएडा फ्लडप्लेन में अब तक ध्वस्त किए गए फार्महाउस की एक संयुक्त संख्या उपलब्ध नहीं है। इसलिए अलग-अलग अभियानों के आंकड़ों को जोड़कर एक कुल संख्या बताना सही नहीं होगा। ग्रेटर नोएडा में फरवरी में तीन दिन के अभियान के दौरान करीब 37 हजार वर्गमीटर अवैध निर्माण हटाया गया था।
कितनी जमीन खाली कराई गई
फरवरी 2026 में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान करीब 37 हजार वर्गमीटर क्षेत्र से अवैध निर्माण हटाया गया था। इसके अलावा नोएडा के एक संबंधित फ्लडप्लेन मामले में फरवरी की कार्रवाई के बाद लगभग 70 हजार वर्गमीटर जमीन मुक्त होने की जानकारी न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज है। इसमें उस क्षेत्र में कुल करीब एक लाख वर्गमीटर अतिक्रमण में से लगभग 70 हजार वर्गमीटर खाली कराया जाना बताया गया था। ये आंकड़े अलग-अलग कार्रवाई क्षेत्रों से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें एक ही अभियान का कुल आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
आगे की रणनीति
प्राधिकरण और प्रशासन की रणनीति चिन्हित अतिक्रमण को चरणबद्ध तरीके से हटाने की है। जून में नोएडा प्राधिकरण ने यमुना-हिंडन डूब क्षेत्र में कार्रवाई के लिए संबंधित क्षेत्रों में नोटिस जारी किए थे। आने वाले समय में भी जहां अवैध निर्माण की पहचान होगी, वहां नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। अभियान के दौरान पुलिस बल की उपलब्धता और मौके की स्थिति के आधार पर कार्रवाई का कार्यक्रम तय किया जाता है।
क्या अभियान जारी रहेगा
उपलब्ध कार्रवाई और अधिकारियों के रुख को देखते हुए फ्लडप्लेन में अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे भी जारी रहने की संभावना है। प्राधिकरण पहले ही नदी के डूब क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। हालांकि किसी खास क्षेत्र में अगली कार्रवाई की तारीख या कितने निर्माण हटाए जाएंगे, इसकी जानकारी आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी। इसलिए स्थानीय लोगों को नोटिस और प्राधिकरण की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
निवासियों और बिल्डरों के लिए चेतावनी
फ्लडप्लेन में जमीन खरीदने या निर्माण कराने से पहले जमीन की कानूनी स्थिति और संबंधित प्राधिकरण के रिकॉर्ड की जांच करना जरूरी है। केवल रजिस्ट्री या किसी निजी दस्तावेज के आधार पर निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता। खरीदारों और बिल्डरों को यह भी देखना चाहिए कि जमीन किसी प्रतिबंधित या डूब क्षेत्र में तो नहीं आती। गलत जानकारी के आधार पर किया गया निवेश भविष्य में कार्रवाई और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
फ्लडप्लेन में निर्माण से जुड़े नियम
नदी के डूब क्षेत्र में निर्माण को लेकर अलग-अलग पर्यावरणीय, सिंचाई और स्थानीय विकास नियम लागू हो सकते हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में प्राधिकरण और संबंधित विभाग ऐसे क्षेत्रों में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। इसलिए किसी भी निर्माण से पहले भूमि का रिकॉर्ड, क्षेत्र की स्थिति और लागू निर्माण नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अवैध निर्माण के कारण बाढ़ से हुए नुकसान के लिए सरकारी मुआवजे की गारंटी नहीं है।
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