किसान आंदोलन से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बना छावनी, पुलिस पहरा और धरना स्थल पर मिट्टी के ढेरों पर उठे सवाल

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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के बाहर किसान आंदोलन से पहले भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। बैरिकेडिंग के साथ जेसीबी और डंपर भी खड़े किए गए हैं। वहीं, धरना स्थल पर मिट्टी के बड़े ढेर लगाए जाने से किसानों में नाराजगी है। किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं।

किसान संघर्ष मोर्चा के प्रस्तावित आंदोलन से पहले ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्राधिकरण कार्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और कई जगह बैरिकेडिंग कर रास्तों को घेर दिया गया है। परिसर के बाहर जेसीबी और डंपर भी खड़े नजर आए। वहीं, आंदोलन से पहले धरना स्थल पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगाए जाने को लेकर किसानों में नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जिस जगह पर वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना देते रहे हैं, वहां मिट्टी डालकर बैठने की जगह ही कम कर दी गई है। इससे आंदोलन से पहले ही माहौल गरमाता दिखाई दे रहा है।


आंदोलन से पहले प्राधिकरण के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा

किसान संघर्ष मोर्चा की ओर से 17 अगस्त को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पर आंदोलन का आह्वान किया गया है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्राधिकरण परिसर के बाहर जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग के जरिए प्रवेश और आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। कई स्थानों पर जेसीबी और डंपर भी खड़े दिखाई दिए। किसानों के आंदोलन को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की स्थिति से निपटने की तैयारी में नजर आ रहा है। हालांकि, किसान अभी तक बड़ी संख्या में प्राधिकरण कार्यालय नहीं पहुंचे थे, लेकिन मौके पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह तैयार रखी गई है।


किसान नेता ने हाउस अरेस्ट का लगाया आरोप

आंदोलन से एक दिन पहले किसान नेता डॉ. रुपेश वर्मा ने एक वीडियो जारी कर दावा किया था कि पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पुलिस के माध्यम से किसानों के आंदोलन को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके बावजूद उन्होंने किसानों से 17 अगस्त को हर हाल में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पहुंचने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाएंगे। किसानों की ओर से लगातार 10 प्रतिशत आबादी के भूखंड, नए भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने समेत कई मांगें उठाई जा रही हैं।


मिट्टी के ढेर लगाने से किसानों में नाराजगी

आंदोलन स्थल पर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर लगाए जाने को लेकर किसान संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जगह उपलब्ध कराने के बजाय धरना स्थल पर ऐसी व्यवस्था नहीं करनी चाहिए, जिससे प्रदर्शनकारियों के बैठने में परेशानी हो। उनका कहना है कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना उनका अधिकार है। ऐसे में आंदोलन से पहले जिस तरह प्राधिकरण परिसर में सुरक्षा बढ़ाई गई और धरना स्थल पर मिट्टी डाली गई, उससे किसानों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। अब सभी की नजर 17 अगस्त के प्रस्तावित आंदोलन पर है।

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