पिता की हत्या के आरोप में जेल में बंद बेटे को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत, कोर्ट ने पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल
- Shiv Kumar
- 23 Aug, 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के एक्सप्रेस-वे थाना क्षेत्र में पिता की हत्या के आरोप में जेल में बंद बेटे सतेन्द्र कुमार को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि पुलिस की मौजूदा कहानी मुख्य रूप से संदेह, कथित इकबालिया बयान और आरोपी की निशानदेही पर बरामद बताई गई लोहे की पिन पर आधारित है। इन परिस्थितियों के आधार पर प्रथम दृष्टया आरोपी को हत्या का दोषी मानने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की पीठ ने पारित किया। अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि जमानत देते समय मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की जा रही है। मुकदमे के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम फैसला होगा। सतेन्द्र कुमार 6 मार्च 2026 से जेल में बंद था और उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
अज्ञात लोगों के खिलाफ हुई थी एफआईआर
मामले की शुरुआत मृतक के पिता की शिकायत से हुई थी, जिसमें अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने मृतक के बेटे सतेन्द्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का दावा था कि पिता और बेटे के संबंध अच्छे नहीं थे और इसी आधार पर बेटे पर संदेह किया गया। इसके बाद उसे हत्या के मामले में आरोपी बनाया गया। बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में दलील दी कि आरोपी के खिलाफ हत्या से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य नहीं है। आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है और उसे मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जेल भेजा गया है।
कथित इकबालिया बयान और लोहे की पिन पर टिकी पुलिस की कहानी
आरोपी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ मिश्रा ने अदालत को बताया कि पुलिस के पास मामले को जोड़ने के लिए मुख्य रूप से दो आधार हैं। पहला आरोपी का पुलिस हिरासत में बताया गया कथित इकबालिया बयान और दूसरा उसकी निशानदेही पर बरामद की गई लोहे की पिन, जिसे हत्या में इस्तेमाल हथियार बताया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि इन दोनों परिस्थितियों के अलावा ऐसा कोई स्वतंत्र और ठोस साक्ष्य सामने नहीं है, जिससे आरोपी की हत्या में संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके। अदालत ने मामले में पेश किए गए साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।
हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम फैसला ट्रायल में होगा
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य की ओर से बचाव पक्ष के तर्कों का प्रभावी तरीके से खंडन नहीं किया जा सका। अदालत के समक्ष कथित इकबालिया बयान और लोहे की पिन के अलावा आरोपी को हत्या से जोड़ने वाला कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं रखा गया। ऐसे में कोर्ट ने सतेन्द्र कुमार को जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि जमानत का आदेश मामले में आरोपी की बेगुनाही का अंतिम फैसला नहीं है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही यह तय होगा कि हत्या के आरोप कितने सही हैं।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






