ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महिला से निवेश के नाम पर 53 लाख की साइबर ठगी, फर्जी मुनाफा दिखाकर जालसाजों ने बनाया शिकार

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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महिला को निवेश कंपनी का अधिकारी बनकर साइबर जालसाजों ने 53 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया। टेलीग्राम ग्रुप में मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर भरोसा जीता गया और फर्जी ऐप से निवेश कराया गया। रकम निकालने पर 15 फीसदी सर्विस चार्ज मांगा गया, जिसके बाद ठगी का खुलासा हुआ।

ग्रेटर नोएडा। निवेश के नाम पर साइबर जालसाजों ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट की एक महिला से करीब 53 लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने खुद को एक निवेश कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर महिला को शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश के जरिए बड़ा मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया। इसके बाद उसे एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया, जहां कथित तौर पर निवेश से होने वाले मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर भरोसा जीता गया। जालसाजों ने महिला को एक ऐसा ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक भेजा, जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं था। महिला ने आरोपियों के बताए तरीके से अलग-अलग चरणों में करीब 53 लाख रुपये निवेश कर दिए। कुछ समय बाद जब उसने अपने खाते में दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश की तो जालसाजों ने 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज की मांग कर दी। इसके बाद महिला को ठगी का शक हुआ। संपर्क करने पर आरोपियों ने बातचीत बंद कर दी। पीड़िता ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम पुलिस से की है।


टेलीग्राम ग्रुप में जोड़कर दिखाए मुनाफे के स्क्रीनशॉट

शुरुआत में साइबर जालसाजों ने महिला से संपर्क कर खुद को निवेश कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताया। उन्होंने शेयर बाजार और आईपीओ में निवेश करने पर कम समय में अच्छा मुनाफा मिलने का दावा किया। भरोसा बढ़ाने के लिए महिला को एक टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ दिया गया। यहां कथित तौर पर दूसरे निवेशकों के मुनाफे के स्क्रीनशॉट और निवेश से जुड़े संदेश दिखाए जाते थे। इससे महिला को लगा कि पूरा निवेश किसी वास्तविक कंपनी की निगरानी में हो रहा है। इसके बाद जालसाजों ने निवेश के लिए अलग-अलग खाते और प्रक्रिया बताई। धीरे-धीरे महिला ने उनके कहने पर बड़ी रकम ट्रांसफर करनी शुरू कर दी और कुल मिलाकर करीब 53 लाख रुपये निवेश कर दिए।


प्ले स्टोर पर नहीं मिला ऐप, लिंक भेजकर कराया डाउनलोड

ठगी के लिए जालसाजों ने महिला को एक ऐप डाउनलोड करने के लिए सीधे लिंक भेजा। यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं था। महिला ने आरोपियों के बताए लिंक से ऐप डाउनलोड किया और उसके जरिए अपने निवेश तथा कथित मुनाफे की जानकारी देखती रही। स्क्रीन पर रकम बढ़ती हुई दिखाई गई, जिससे महिला को अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न मिलने का भरोसा बना रहा। जब महिला ने जमा रकम और मुनाफा निकालने का प्रयास किया तो जालसाजों ने अचानक 15 प्रतिशत सर्विस चार्ज की मांग कर दी। रकम निकालने के लिए अतिरिक्त भुगतान मांगे जाने पर महिला को पूरे मामले पर संदेह हुआ।


पैसे मांगने के बाद संपर्क हुआ बंद

महिला ने जब जालसाजों से सर्विस चार्ज और रकम वापस मिलने को लेकर बातचीत करने की कोशिश की तो आरोपियों ने जवाब देना बंद कर दिया। फोन और ऑनलाइन माध्यमों से संपर्क करने के प्रयास भी सफल नहीं हुए। इसके बाद महिला को समझ आया कि निवेश के नाम पर उसके साथ साइबर ठगी की गई है। मामले में पीड़िता ने साइबर क्राइम पुलिस से शिकायत की है। पुलिस शिकायत के आधार पर ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, टेलीग्राम ग्रुप और ऐप से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती है। साइबर ठगी के मामलों में पुलिस लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास करती है।


निवेश से पहले करें पूरी जांच

साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले कंपनी और उसके आधिकारिक प्लेटफॉर्म की जांच करना जरूरी है। सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप पर मिले निवेश प्रस्तावों पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी अनजान लिंक से ऐप डाउनलोड करने और पैसे ट्रांसफर करने से भी बचना चाहिए। खासतौर पर निवेश की रकम निकालने के लिए अलग से टैक्स, सर्विस चार्ज या अन्य शुल्क मांगा जाए तो सावधान हो जाना चाहिए। ऐसे मामलों में जल्द से जल्द संबंधित बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है।

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