नोएडा में बनेगा बड़ा CBG प्लांट, 12 एकड़ में होगा निर्माण, रोज तैयार होगी 16 हजार किलो गैस और 100 टन जैविक खाद

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नोएडा के सेक्टर-145 में 600 मीट्रिक टन क्षमता का सीबीजी प्लांट लगाया जाएगा। कचरे से रोजाना करीब 16 हजार किलो सीबीजी और 100 टन जैविक खाद तैयार करने का लक्ष्य है। परियोजना से कचरा निस्तारण, प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नोएडा। शहर में रोज निकलने वाले करीब 1,300 मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण की दिशा में नोएडा प्राधिकरण बड़ी पहल करने जा रहा है। सेक्टर-145 में 600 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट में कचरे का इस्तेमाल कर रोजाना करीब 16 हजार किलो सीबीजी और लगभग 100 टन जैविक खाद तैयार करने का लक्ष्य है। इससे एक ओर जहां शहर में बढ़ते कचरे के निस्तारण की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर कचरे से उपयोगी ईंधन और खाद तैयार की जा सकेगी। नोएडा प्राधिकरण के जीएम एसपी सिंह के मुताबिक, परियोजना के लिए करीब 12 एकड़ जमीन कंपनी को उपलब्ध कराई जाएगी। प्लांट को स्थापित करने और उसके संचालन की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। प्राधिकरण को इसके निर्माण और संचालन पर अपनी ओर से कोई राशि खर्च नहीं करनी होगी। परियोजना शुरू होने के बाद कचरे के ढेर, बदबू और खुले में कचरा जलाने से होने वाले प्रदूषण को कम करने की उम्मीद है।


सेक्टर-145 में 12 एकड़ जमीन पर बनेगा प्लांट

नोएडा प्राधिकरण की योजना के मुताबिक सेक्टर-145 में करीब 12 एकड़ जमीन पर सीबीजी प्लांट स्थापित किया जाएगा। प्लांट लगाने और इसे संचालित करने का काम चयनित कंपनी करेगी। प्राधिकरण की भूमिका मुख्य रूप से कचरा उपलब्ध कराने और परियोजना के लिए जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने की होगी। फिलहाल प्लांट के संचालन और कचरे के निस्तारण से संबंधित शर्तों का मसौदा तैयार किया जा रहा है। शर्तों पर सहमति बनने के बाद संबंधित कंपनी के साथ एमओयू किए जाने की तैयारी है। प्राधिकरण का कहना है कि परियोजना से शहर के ठोस कचरा प्रबंधन को एक नई दिशा मिल सकती है।


250 गाड़ियों से प्लांट तक पहुंचाया जाएगा कचरा

प्लांट तक कचरा पहुंचाने की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की होगी। इसके लिए शहर के प्राथमिक कचरा संग्रहण केंद्रों से सेक्टर-145 तक कचरा पहुंचाया जाएगा। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण करने वाली कंपनी की करीब 250 गाड़ियों का इस्तेमाल इस व्यवस्था में किया जा सकता है। शहर में घरों और अन्य स्थानों से एकत्र होने वाले कचरे को निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। इससे कचरे के परिवहन और निस्तारण की व्यवस्था को एकीकृत करने में मदद मिलेगी। प्लांट की क्षमता के अनुसार कचरे का इस्तेमाल कर ऊर्जा और जैविक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।


रोज 16 हजार किलो सीबीजी और 100 टन खाद का लक्ष्य

600 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले प्लांट से करीब 16 हजार किलो सीबीजी तैयार होने का अनुमान है। इसके अलावा लगभग 100 टन जैविक खाद भी तैयार की जाएगी। सीबीजी का इस्तेमाल गैस से चलने वाले वाहनों और जनरेटर सेट में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है। कचरे से उपयोगी उत्पाद तैयार होने से पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। परियोजना से करीब 30 फीसदी तक कार्बन क्रेडिट मिलने की उम्मीद भी जताई गई है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन प्लांट के संचालन और मिलने वाले कचरे की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।


कचरे से ईंधन के साथ तैयार होगा ग्रीन कोल

प्रस्तावित प्लांट में ठोस कचरे के निस्तारण के दौरान टॉरिफाइड चारकोल और ग्रीन कोल जैसे उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। इनका इस्तेमाल ईंधन के रूप में किया जा सकता है। परियोजना का उद्देश्य केवल कचरे को हटाना नहीं, बल्कि उससे उपयोगी संसाधन तैयार करना भी है। इससे शहर में कचरे के ढेर कम होने और खुले में कूड़ा जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। आसपास रहने वाले लोगों को कचरे से आने वाली बदबू और गंदगी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।


नोएडा में रोज निकलता है करीब 1,300 टन कचरा

नोएडा में प्रतिदिन करीब 1,300 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें लगभग 400 मीट्रिक टन गीला कचरा, 600 मीट्रिक टन सूखा कचरा और करीब 300 मीट्रिक टन सीएंडडी वेस्ट शामिल है। वहीं, ग्रेटर नोएडा में भी रोजाना करीब 300 मीट्रिक टन गीला कचरा निकलने का अनुमान है। ऐसे में सेक्टर-145 का प्रस्तावित सीबीजी प्लांट शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण परियोजना साबित हो सकता है।

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