कार-कैब में आग लगने की घटनाओं से बढ़ा खतरा, नोएडा में वाहन चालक इन जरूरी सावधानियों का रखें ध्यान

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नोएडा में हाल के दिनों में चलती कार और कैब में आग की घटनाओं ने वाहन सुरक्षा पर चिंता बढ़ाई है। सेक्टर-97 की घटना में चालक सुरक्षित बच गया। वायरिंग, तकनीकी खराबी और ओवरहीटिंग जैसे संभावित जोखिमों से बचने के लिए नियमित सर्विसिंग और सावधानी जरूरी है।

नोएडा में हाल के दिनों में चलती कार और कैब में आग लगने की घटनाओं ने वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। अगस्त 2026 में सेक्टर-97 के पास चलती कैब में अचानक आग लग गई थी। ड्राइवर ने समय रहते गाड़ी से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, लेकिन आग ने देखते ही देखते पूरी कार को अपनी चपेट में ले लिया। इसी दौरान सेक्टर-99/100 क्षेत्र में भी एक चलती सीएनजी वैगनआर कैब में आग लगने की घटना सामने आई थी। इन घटनाओं में किसी व्यक्ति की जान जाने की सूचना नहीं मिली, लेकिन दोनों मामलों ने सड़क पर चलने वाले वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। सेक्टर-97 की घटना में आग लगने का सटीक कारण तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ था। ऐसे मामलों में वाहन की वायरिंग, इंजन से जुड़ी खराबी, ईंधन या गैस सिस्टम और अत्यधिक गर्मी जैसे कई कारणों की जांच की जाती है। वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि कार में असामान्य गंध, धुआं, स्पार्किंग या तापमान बढ़ने जैसे संकेत दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज न करें। समय रहते गाड़ी रोकना और सुरक्षित दूरी बनाना जान बचाने में सबसे अहम कदम हो सकता है।


हाल ही में नोएडा में हुई आग की घटनाएं

अगस्त में नोएडा में कार और कैब में आग लगने की एक से ज्यादा घटनाएं सामने आईं। सेक्टर-97 के पास एक चलती कैब में अचानक आग लगी और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया। ड्राइवर समय रहते बाहर निकल गया। इसके कुछ समय बाद सेक्टर-99 के आसपास भी सीएनजी वैगनआर कैब में आग लगने की सूचना मिली। पुलिस के अनुसार चालक सेक्टर-104 की तरफ से आ रहा था, तभी वाहन से धुआं निकलने लगा और उसने गाड़ी किनारे रोक दी। दमकल की टीम ने आग बुझाई। इन घटनाओं में किसी के घायल होने की सूचना नहीं थी। हालांकि, घटनाएं यह बताती हैं कि चलते वाहन में शुरुआती संकेतों को पहचानना जरूरी है। अगर बोनट से धुआं निकले, जलने की गंध आए या बिजली के उपकरण असामान्य तरीके से गर्म हों तो चालक को तुरंत सावधान हो जाना चाहिए।


सेक्टर 97 में कैब में आग

सेक्टर-97 के पास चलती कैब में आग लगने की घटना अगस्त 2026 में हुई थी। बताया गया कि वाहन सड़क पर चल रहा था, तभी अचानक उसमें आग लग गई। कुछ ही समय में आग इतनी तेजी से फैल गई कि पूरी कार उसकी चपेट में आ गई। ड्राइवर ने समय रहते कैब से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। सूचना मिलने पर दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक वाहन बुरी तरह जल चुका था। घटना के दौरान सड़क पर भी अफरा-तफरी की स्थिति बन गई थी। इस मामले में आग लगने का सटीक कारण तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ था। इसलिए इसे सीधे शॉर्ट सर्किट या किसी एक तकनीकी खराबी से जोड़ना सही नहीं होगा। घटना के बाद वाहन चालकों के लिए यह जरूरी है कि वे कार की वायरिंग, बैटरी, ईंधन सिस्टम और इंजन की नियमित जांच कराते रहें।


घटना के दौरान क्या हुआ

सेक्टर-97 की घटना में सबसे अहम बात यह रही कि ड्राइवर ने आग बढ़ने से पहले वाहन छोड़ दिया। कार में आग लगने के बाद कुछ ही समय में लपटें तेज हो गईं और पूरा वाहन उसकी चपेट में आ गया। ऐसे मामलों में कुछ सेकंड भी काफी महत्वपूर्ण होते हैं। अगर चालक को बोनट या डैशबोर्ड के आसपास से धुआं दिखाई देता है तो उसे सुरक्षित जगह पर गाड़ी रोकनी चाहिए और इंजन बंद कर देना चाहिए। इसके बाद यात्रियों को तुरंत वाहन से बाहर निकालकर गाड़ी से काफी दूरी पर जाना चाहिए। आग बढ़ने की स्थिति में बोनट खोलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अचानक हवा मिलने से आग तेज हो सकती है। यूपी पुलिस की अग्निशमन सलाह के अनुसार अगर आग फैल रही हो या आपके पास पर्याप्त अग्निशमन उपकरण न हो तो खुद आग बुझाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।


गाड़ी में आग लगने के मुख्य कारण

कार में आग लगने के पीछे कई कारण हो सकते हैं और हर घटना में वजह अलग हो सकती है। पुरानी या खराब वायरिंग, शॉर्ट सर्किट, ढीले कनेक्शन, बैटरी की खराबी, ईंधन या गैस का रिसाव, इंजन का ज्यादा गर्म होना और गलत तरीके से लगाए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आग का खतरा बढ़ा सकते हैं। सीएनजी वाहनों में गैस सिस्टम की नियमित जांच और प्रमाणित तकनीशियन से सर्विसिंग विशेष रूप से जरूरी है। कार में अतिरिक्त वायरिंग, सस्ती एक्सेसरीज या गैर-मानक उपकरण लगवाने से भी इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। अगर वाहन से लगातार जलने की गंध आ रही है या वायरिंग गर्म हो रही है तो इसे सामान्य बात मानकर वाहन चलाते रहना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर या प्रशिक्षित मैकेनिक से जांच कराना बेहतर है।


शॉर्ट सर्किट और वायरिंग की समस्या

वाहन की वायरिंग में खराबी आग का एक संभावित कारण हो सकती है। पुराने तारों की इंसुलेशन खराब होने, कनेक्शन ढीले होने या गलत तरीके से अतिरिक्त वायर लगाने से स्पार्किंग हो सकती है। यूपी पुलिस की अग्नि सुरक्षा सलाह में भी पुरानी वायरिंग, घिसे इंसुलेशन और खराब इलेक्ट्रिकल फिटिंग को आग के संभावित खतरे के तौर पर बताया गया है। कार में मोबाइल चार्जर, म्यूजिक सिस्टम, लाइट या दूसरी इलेक्ट्रॉनिक एक्सेसरीज लगवाते समय भी गुणवत्ता का ध्यान रखना चाहिए। किसी अनजान या गैर-प्रशिक्षित व्यक्ति से वायरिंग में बदलाव करवाना आगे चलकर परेशानी पैदा कर सकता है। अगर फ्यूज बार-बार उड़ रहा है, किसी तार से जलने की गंध आ रही है या डैशबोर्ड पर असामान्य संकेत दिखाई दे रहे हैं तो वाहन की तुरंत जांच करानी चाहिए।


गर्मी और इंजन ओवरहीटिंग

गर्मी के मौसम में लंबे समय तक वाहन चलाने पर इंजन का तापमान बढ़ सकता है। हालांकि केवल गर्मी को कार में आग लगने का सीधा कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन खराब कूलिंग सिस्टम, कम कूलेंट, इंजन ऑयल की समस्या या दूसरी तकनीकी खराबियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। अगर वाहन का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ रहा है, इंजन से भाप या धुआं निकल रहा है या जलने जैसी गंध आ रही है तो चालक को तुरंत सुरक्षित स्थान पर गाड़ी रोकनी चाहिए। ऐसी स्थिति में गर्म इंजन का बोनट तुरंत खोलना भी जोखिम भरा हो सकता है। वाहन को ठंडा होने देना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर है। यूपी पुलिस की अग्नि सुरक्षा सलाह में भी मोटर को ओवरहीट होने से बचाने और उसे अच्छी स्थिति में रखने पर जोर दिया गया है।


आग से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

कार में आग से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि वाहन की नियमित जांच कराई जाए और छोटी तकनीकी समस्या को नजरअंदाज न किया जाए। बैटरी के कनेक्शन, वायरिंग, इंजन, ईंधन लाइन और कूलिंग सिस्टम की समय-समय पर जांच कराना उपयोगी है। सीएनजी वाहन में गैस सिस्टम की जांच प्रशिक्षित तकनीशियन से ही करानी चाहिए। वाहन में गैर-जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अतिरिक्त वायरिंग से बचना चाहिए। गाड़ी में पेट्रोल, डीजल या अन्य ज्वलनशील पदार्थ की बोतल रखकर चलना भी खतरनाक हो सकता है। पार्किंग करते समय वाहन को ऐसे स्थान पर खड़ा करें जहां आग लगने की स्थिति में दूसरे वाहनों से दूरी हो। कार से असामान्य धुआं या गंध आने पर यात्रा जारी रखने के बजाय वाहन की जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है। छोटी सावधानी बड़ी दुर्घटना को रोक सकती है।


नियमित सर्विसिंग का महत्व

कार की नियमित सर्विसिंग केवल माइलेज और इंजन की बेहतर कार्यक्षमता के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। सर्विस के दौरान इंजन, बैटरी, वायरिंग, फ्यूज, कूलेंट, ब्रेक और ईंधन से जुड़े हिस्सों की स्थिति की जांच कराई जा सकती है। अगर कोई तार गर्म हो रहा है या किसी हिस्से में लीकेज है तो समय रहते उसका पता लगाया जा सकता है। खासकर पुरानी कार और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाली कैब के लिए सर्विसिंग को टालना ठीक नहीं है। कैब चालकों को वाहन में लगातार आने वाली छोटी समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि वाहन का इस्तेमाल सामान्य निजी कार की तुलना में काफी ज्यादा होता है। किसी दुर्घटना के बाद वाहन की मरम्मत भी प्रशिक्षित तकनीशियन से कराना जरूरी है। सस्ती मरम्मत के चक्कर में वायरिंग या सुरक्षा सिस्टम से समझौता आगे चलकर बड़ा खतरा बन सकता है।


कार में फायर एक्सटिंग्विशर रखना

कार में छोटा और उपयुक्त अग्निशामक यंत्र रखना शुरुआती आग पर नियंत्रण पाने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे तभी इस्तेमाल करना चाहिए जब आग छोटी हो और बाहर निकलने का रास्ता सुरक्षित हो। यूपी पुलिस की अग्निशमन सलाह में भी बताया गया है कि अग्निशामक शुरुआती या सीमित आग के लिए उपयोगी होता है और आग फैलने पर खुद उससे मुकाबला नहीं करना चाहिए। वाहन चालक को यह भी पता होना चाहिए कि एक्सटिंग्विशर कैसे चलाया जाता है। सामान्य तौर पर पिन निकालकर नोजल को आग के आधार की तरफ रखना, हैंडल दबाना और नियंत्रित तरीके से एजेंट डालना होता है। अगर आग तेजी से बढ़ रही है, धुआं बहुत ज्यादा है या रास्ता बंद हो रहा है तो एक्सटिंग्विशर के बजाय तुरंत बाहर निकलना प्राथमिकता होनी चाहिए।


आग लगने पर तुरंत क्या करें

अगर चलती कार या कैब में आग लग जाए तो सबसे पहले घबराने के बजाय वाहन को सुरक्षित जगह पर रोकें और इंजन बंद करें। सभी यात्रियों को तुरंत बाहर निकालें और वाहन से दूर चले जाएं। सड़क पर हों तो खुद को ट्रैफिक और आग दोनों से सुरक्षित दूरी पर रखें। आग बढ़ने पर बोनट या डिक्की खोलने की कोशिश न करें और वाहन के आसपास भीड़ न लगने दें। अगर आग छोटी है और आपके पास सही अग्निशामक है, तभी सुरक्षित दूरी से उसका इस्तेमाल करें। किसी भी स्थिति में जलती कार में वापस जाकर मोबाइल, दस्तावेज या सामान निकालने की कोशिश न करें। यूपी में फायर ब्रिगेड के लिए 101 नंबर उपलब्ध है। आग की सूचना देते समय वाहन की सही लोकेशन बताएं और लोगों को वाहन से दूर रखें।

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