ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड बैठक: किसानों को बढ़ा मुआवजा, एलिवेटेड रोड पर बड़ा फैसला
- Shiv Kumar
- 15 Sep, 2026
ग्रेटर नोएडा में किसानों और शहर की कनेक्टिविटी से जुड़े दो बड़े फैसले इस समय चर्चा में हैं। प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में जमीन अधिग्रहण से जुड़े किसानों के मुआवजे की दर बढ़ाने का फैसला लिया गया है। वहीं, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद के बीच यातायात को आसान बनाने के लिए डबल-डेकर एलिवेटेड रोड परियोजना को भी मंजूरी मिली है। मुआवजे की नई दर 4,125 रुपये से बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर कर दी गई है। यानी किसानों को प्रति वर्गमीटर 2,290 रुपये ज्यादा मिलेंगे। इसके साथ ही करीब एक दशक बाद 6 प्रतिशत आबादी भूखंड का प्रावधान भी फिर से लागू किया गया है। दूसरी ओर शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के बीच 2.5 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी मिलने से रोजाना जाम से परेशान लोगों को राहत की उम्मीद है। हालांकि किसानों की कई पुरानी मांगें अभी भी पूरी नहीं हुई हैं। इसी वजह से किसान संघर्ष मोर्चा ने 9 सितंबर को प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन और घेराव का ऐलान किया था। इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि ग्रेटर नोएडा में विकास परियोजनाओं के साथ किसान मुद्दे भी अहम बने हुए हैं।
बोर्ड बैठक के मुख्य बिंदु
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 144वीं बोर्ड बैठक में शहर के विकास और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर फैसला लिया गया। बैठक में जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को मिलने वाले मुआवजे की दर 4,125 रुपये से बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर करने को मंजूरी दी गई। यह बढ़ोतरी 2,290 रुपये प्रति वर्गमीटर है। इसके अलावा 6 प्रतिशत आबादी भूखंड देने का प्रावधान भी दोबारा लागू किया गया है। किसानों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय से जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे और आबादी भूखंड को लेकर मांग उठती रही है। इसी बैठक में ग्रेटर नोएडा वेस्ट से गाजियाबाद की ओर यातायात सुधारने वाली डबल-डेकर एलिवेटेड रोड परियोजना को भी मंजूरी दी गई।
किसानों के मुआवजे में बढ़ोतरी
किसानों के लिए सबसे बड़ा फैसला जमीन अधिग्रहण के मुआवजे में बढ़ोतरी का रहा। नई दर 6,415 रुपये प्रति वर्गमीटर तय की गई है, जबकि पहले यह 4,125 रुपये थी। यानी किसानों को अब हर वर्गमीटर पर 2,290 रुपये अधिक मिलेंगे। इसके साथ ही 6 प्रतिशत आबादी भूखंड का प्रावधान फिर शुरू किया गया है। इस व्यवस्था में आबादी भूखंड का विकल्प चुनने वाले किसानों के लिए अलग मुआवजा दर बताई गई है। करीब दस साल पहले बंद किए गए इस प्रावधान को फिर लागू किए जाने को किसानों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि किसान संगठन अभी भी मुआवजे को पर्याप्त नहीं मान रहे हैं और बाजार भाव के मुकाबले इसे कम बताते हुए अपनी अन्य मांगों पर भी समाधान चाहते हैं।
एलिवेटेड रोड परियोजना की स्थिति
ग्रेटर नोएडा की बोर्ड बैठक में शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के बीच करीब 2.5 किलोमीटर लंबे डबल-डेकर एलिवेटेड कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 756 करोड़ रुपये है। इसका उद्देश्य ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी और गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक क्षेत्र के बीच आवाजाही को आसान करना है। इस हिस्से में मौजूदा सड़क काफी संकरी है और यहां रोजाना ट्रैफिक दबाव रहता है। डबल-डेकर डिजाइन के कारण सीमित जगह में ज्यादा यातायात को संभालने की कोशिश की जाएगी। परियोजना की डीपीआर एनएचएआई ने तैयार की है और निर्माण की जिम्मेदारी भी एनएचएआई को दी गई है। इसे उत्तर प्रदेश की पहली डबल-डेकर एलिवेटेड परियोजना बताया जा रहा है।
किसान संघर्ष मोर्चा की मांगें
किसान संघर्ष मोर्चा लंबे समय से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और प्रशासन के सामने कई मांगें उठा रहा है। इनमें 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, आबादी से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण, अतिरिक्त मुआवजा, सर्किल रेट में बदलाव और नए भूमि अधिग्रहण कानून से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। किसान नेताओं का कहना है कि कई बार अधिकारियों की ओर से बातचीत और समाधान का भरोसा दिया गया, लेकिन ठोस स्तर पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई। मोर्चे के अनुसार, 2023 के आंदोलन के बाद 10 प्रतिशत आबादी भूखंड से जुड़ा प्रस्ताव बोर्ड से पास होकर शासन को भेजा गया था, लेकिन उसके लागू होने का इंतजार अभी भी बना हुआ है। किसान संगठन चाहते हैं कि उनकी सभी मांगों पर समयबद्ध तरीके से फैसला लिया जाए।
लंबित मांगें क्या हैं
मुआवजे में बढ़ोतरी के बावजूद किसानों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। किसान संगठनों का कहना है कि अभी कई पुराने मामले लंबित हैं। इनमें आबादी के मामलों का निस्तारण, 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, अतिरिक्त मुआवजा और सर्किल रेट में संशोधन प्रमुख हैं। किसान संघर्ष मोर्चा नए भूमि कानून के अनुसार 20 प्रतिशत विकसित भूखंड और 20 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर मुआवजे की मांग भी उठा रहा है। यह मांगें किसान संगठनों की ओर से रखी गई हैं, इन्हें प्राधिकरण की मंजूर योजना नहीं माना जाना चाहिए। किसानों का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के बाद उनके सामने रोजगार, आवास और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े होते हैं। इसलिए केवल मुआवजा बढ़ाने के बजाय बाकी मांगों पर भी ठोस समाधान जरूरी है।
9 सितंबर के धरने की तैयारी
किसान संघर्ष मोर्चा ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 9 सितंबर को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर धरना-प्रदर्शन और घेराव का ऐलान किया था। यह फैसला 25 अगस्त को हुई मोर्चे की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया था। किसान नेताओं का कहना था कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद तीनों प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ उनकी मांगों पर ठोस बातचीत नहीं हो सकी। इसी को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ी और आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। 9 सितंबर के कार्यक्रम में 10 प्रतिशत आबादी भूखंड, लंबित आबादी मामलों, नए भूमि कानून और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। अब आंदोलन के आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि प्राधिकरण और किसान प्रतिनिधियों के बीच मांगों पर कितनी गंभीर बातचीत होती है।
क्षेत्र के विकास पर प्रभाव
मुआवजे में बढ़ोतरी और बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी का असर आने वाले समय में ग्रेटर नोएडा के विकास पर दिखाई दे सकता है। किसानों को अधिक मुआवजा मिलने से जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्राधिकरण को मदद मिल सकती है और नई विकास परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाना आसान हो सकता है। वहीं डबल-डेकर एलिवेटेड रोड बनने से ग्रेटर नोएडा वेस्ट, शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के बीच आने-जाने वाले लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। खासकर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले यात्रियों को वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। हालांकि परियोजना को जमीन पर उतारने में निर्माण, यातायात प्रबंधन और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल अहम रहेगा। विकास के साथ किसानों की लंबित समस्याओं का समाधान भी जरूरी होगा, तभी क्षेत्र का विकास ज्यादा संतुलित तरीके से आगे बढ़ सकेगा।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






