जेवर एयरपोर्ट: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पूरी जानकारी, उड़ानें, कनेक्टिविटी और विस्तार योजना
- Shiv Kumar
- 15 Sep, 2026
दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब सिर्फ निर्माणाधीन परियोजना नहीं रहा, बल्कि यहां से व्यावसायिक उड़ानों का संचालन शुरू हो चुका है। 15 जून 2026 से एयरपोर्ट पर कमर्शियल फ्लाइट्स शुरू होने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा, आगरा और आसपास के इलाकों के लोगों के लिए हवाई सफर का एक नया विकल्प सामने आया है। एयरपोर्ट को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। शुरुआती चरण में एक रनवे और यात्री टर्मिनल के साथ संचालन शुरू हुआ है, जबकि आगे चलकर रनवे की संख्या और यात्री क्षमता दोनों बढ़ाने की योजना है। एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसकी सड़क कनेक्टिविटी है, क्योंकि यह यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित है। फिलहाल यात्रियों के लिए सड़क मार्ग ही मुख्य साधन है, लेकिन भविष्य में मेट्रो और नमो भारत जैसी तेज परिवहन सेवाओं से जोड़ने की योजनाएं भी आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट सिर्फ हवाई यात्रा का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि पूरे यमुना क्षेत्र के विकास और कनेक्टिविटी को भी नई दिशा दे सकता है।
एयरपोर्ट का वर्तमान स्टेटस
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण तैयार होने के बाद यहां 15 जून 2026 से कमर्शियल उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। एयरपोर्ट को डीजीसीए का एयरोड्रोम लाइसेंस भी मिल चुका है। पहले चरण में एक रनवे के साथ यात्री सेवाएं शुरू की गई हैं। एयरपोर्ट की ऑपरेटर कंपनी के अनुसार यहां घरेलू रूट्स का नेटवर्क लगातार बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती संचालन में इंडिगो और अकासा एयर जैसी एयरलाइनों की सेवाएं शुरू हुईं, जबकि एयर इंडिया एक्सप्रेस ने भी यहां से संचालन की पुष्टि की है। फिलहाल एयरपोर्ट का मुख्य फोकस घरेलू यात्री सेवाओं पर है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी आगे विस्तार की तैयारी है। एयरपोर्ट को लंबे समय में एनसीआर के बड़े विमानन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
शुरू हो चुकी उड़ानें
जेवर एयरपोर्ट से पहली व्यावसायिक उड़ान 15 जून 2026 को शुरू हुई। शुरुआती चरण में इंडिगो ने यहां से उड़ान संचालन शुरू किया और इसके बाद अकासा एयर की सेवाएं भी जुड़ीं। एयरपोर्ट से घरेलू शहरों के लिए उड़ानों का नेटवर्क चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती नेटवर्क में देश के प्रमुख शहरों को जोड़ने पर जोर दिया गया है। एयरपोर्ट की वेबसाइट पर यात्रियों के लिए उड़ानों और गंतव्यों की जानकारी देखने की सुविधा भी उपलब्ध है। अलग-अलग एयरलाइनों की समय-सारणी के अनुसार रूट और उड़ानों की संख्या में बदलाव हो सकता है, इसलिए टिकट बुक करने से पहले संबंधित एयरलाइन का शेड्यूल देखना बेहतर रहेगा। आने वाले समय में और घरेलू शहरों के साथ अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी बढ़ने की उम्मीद है।
रनवे विस्तार की योजना
जेवर एयरपोर्ट को शुरुआत से ही बड़े पैमाने पर विस्तार को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। अभी पहले चरण में एक रनवे से संचालन हो रहा है, लेकिन आगे यात्री संख्या और उड़ानों की मांग बढ़ने के साथ अतिरिक्त रनवे बनाए जाने की योजना है। दूसरे चरण के लिए जमीन और विस्तार से जुड़े काम आगे बढ़ चुके हैं, जिसमें दूसरा रनवे और विमान रखरखाव से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। राज्य की दीर्घकालिक योजना एयरपोर्ट को कई चरणों में विकसित करने की है। अलग-अलग सरकारी योजनाओं में भविष्य में पांच रनवे तक विस्तार का लक्ष्य बताया गया है, जबकि लंबे समय के मास्टर प्लान में इससे भी बड़े विस्तार की कल्पना की गई है। यानी मौजूदा रनवे एयरपोर्ट की शुरुआत है, अंतिम क्षमता नहीं।
जेवर एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचें
फिलहाल जेवर एयरपोर्ट पहुंचने का सबसे आसान तरीका सड़क मार्ग है। एयरपोर्ट का मुख्य संपर्क यमुना एक्सप्रेसवे से है, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और मथुरा की ओर से आने वाले यात्रियों को सीधा रास्ता मिलता है। निजी कार, टैक्सी और बस के जरिए एयरपोर्ट पहुंचा जा सकता है। एयरपोर्ट परिसर में यात्रियों के लिए ग्राउंड ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था भी विकसित की गई है। नोएडा और आसपास के शहरों से आने वाले यात्रियों के लिए कैब और बस सेवाएं उपयोगी विकल्प हैं। आगे चलकर एयरपोर्ट के आसपास कई नए सड़क प्रोजेक्ट भी तैयार किए जा रहे हैं। इनमें दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना क्षेत्र से एयरपोर्ट को जोड़ने वाला ग्रीनफील्ड कॉरिडोर और अन्य क्षेत्रीय सड़क संपर्क शामिल हैं।
सड़क मार्ग से कनेक्टिविटी
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसकी लोकेशन और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी है। एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे के पास होने के कारण नोएडा और ग्रेटर नोएडा से सड़क के जरिए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा आसपास के राष्ट्रीय राजमार्गों और क्षेत्रीय सड़कों को भी एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम की तरफ से आने वाले यात्रियों के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के सोहना स्पर से एयरपोर्ट तक ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी कॉरिडोर महत्वपूर्ण होगा। दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद की ओर से एयरपोर्ट पहुंच आसान बनाने के लिए भी सड़क परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। इससे भविष्य में अलग-अलग दिशाओं से आने वाले यात्रियों को एक ही रास्ते पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और एयरपोर्ट की क्षेत्रीय पहुंच बढ़ेगी।
मेट्रो और रेल कनेक्टिविटी
अभी जेवर एयरपोर्ट पर सीधे मेट्रो या नमो भारत ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। भविष्य में एयरपोर्ट को मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट नेटवर्क से जोड़ने की योजनाएं जरूर बनाई गई हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से एयरपोर्ट की ओर मेट्रो कनेक्टिविटी और गाजियाबाद से जेवर तक नमो भारत कॉरिडोर पर योजना और सर्वे का काम आगे बढ़ रहा है। एनसीआरटीसी के स्तर पर गाजियाबाद-जेवर कनेक्शन को लेकर सर्वे शुरू होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह की परियोजनाएं पूरी होने के बाद यात्रियों को सड़क के अलावा तेज सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। हालांकि इन परियोजनाओं को अभी मौजूदा एयरपोर्ट की नियमित यात्री सेवा का हिस्सा नहीं माना जा सकता।
आने वाले समय में क्या बदलेगा
आने वाले वर्षों में जेवर एयरपोर्ट का मौजूदा स्वरूप काफी बदलने की उम्मीद है। उड़ानों की संख्या बढ़ने के साथ नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट जुड़ सकते हैं। दूसरे रनवे, अतिरिक्त टर्मिनल, कार्गो सुविधाओं और विमान रखरखाव से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाएगा। सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ मेट्रो और नमो भारत जैसी परियोजनाएं पूरी होती हैं तो नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और आसपास के शहरों से एयरपोर्ट पहुंचना और आसान होगा। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स, होटल, कारोबार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं। हालांकि इन बदलावों का असर चरणबद्ध तरीके से दिखाई देगा। फिलहाल एयरपोर्ट का संचालन शुरुआती चरण में है और आने वाले विस्तार के साथ इसकी भूमिका पूरे एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए और महत्वपूर्ण होने की उम्मीद है।
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