Sambhal में रमजान के पाक महीने में उतारे मुस्लिमों ने लाउड स्पीकर, अपनाया सेहरी के लिए ये ख़ास तरीका

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संभल की शाही जामा मस्जिद विवाद के बाद से सुर्खियों में बनी हुई है.

संभल की शाही जामा मस्जिद विवाद के बाद से सुर्खियों में बनी हुई है. वहीं अब रमजान के महीने में एक नई चर्चा शुरू हो गई है. जो कि रमजान के महीने में सेहरी और इफ्तार के वक्त होने वाले ऐलान को लेकर है. पूरे प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. संभल में भी इसका पालन किया जा रहा है. यहां पर भी मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतार दिए गए हैं. तो कुछ जिम्मेदारों ने खुद ही लाउडस्पीकर उतार दिए है. ऐसे हालात में रमजान के महीने में रोजेदारों को सेहरी और इफ्तार के वक्त का ऐलान करने के लिए मस्जिदों के इमाम और मोअज्जन ने अनोखी तरकीब निकाल ली है.

रोजेदार नहीं सुन पा रहे अजान और ऐलान 

मुस्लिम लोग रमजान के महीने में रोजा रखते हैं. इसके लिए वे सुबह सूरज निकलने से पहले उठकर सेहरी करते हैं, फिर दिनभर बिना कुछ खाए-पिए शाम में सूरज छिपते ही इफ्तारी करते हैं. इसके लिए रोजा रखने वाले मुसलमान मस्जिदों से होने वाले सेहरी और इफ्तार के वक्त के ऐलान का इंतजार करते रहते हैं. इस बार मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरने की वजह से रोजेदारों को ना तो ऐलान और ना ही अजान की आवाज सुनाई दे रही है.

जिम्मेदारों ने निकाला गजब का उपाय

रमजान के महीने में मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतरने के बाद अजान और सेहरी-इफ्तार का वक्त बताने के लिए मस्जिद के जिम्मेदारों ने गजब का उपाय खोज निकाला है. सुबह सेहरी के वक्त शहर की मस्जिदों की छत से मस्जिद के इमाम, मोअज्जन या अन्य कोई जिम्मेदार व्यक्ति ऐलान कर रहे हैं. सुबह की खमोशी में आवाज खूब गूंजती है, जिसे सुनकर रोजा रखने वाले लोग जाग जाते हैं और समय पर सेहरी कर रोजा रख लेते हैं. इसके अलावा कई जिम्मेदार मुस्लिम इलाकों में जाकर ढोल या अन्य संसाधनों के द्वारा उठा रहे हैं.

मस्जिद के जिम्मेदारों की पहल से रोजेदारों को सहूलियत 

इसके साथ ही मस्जिदों की छत से पांचों वक्त की अजान दी जा रही है. यहीं से इफ्तार का ऐलान भी शाम होते ही किया जाता है. इस पहल से रोजा रखने वाले रोजेदारों को काफी सहूलियत मिल रही है. इसको लेकर संभल के रहने वाले इस्लामिक धर्मगुरु मुफ्ती मौलाना नूरी रजा ने कहा है कि मुसलमान यूपी सरकार के आदेश का पालन कर रहे हैं. इस आदेश पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है. वे कहते हैं कि रमजान का महीना चल रहा है. सेहरी, इफ्तार और नमाज के वक्त मस्जिदों की छतों से खड़े होकर अजान से किसी को कोई परेशानी नहीं हो रही है.

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