RTI से खुलासा: EC के अफसर के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने की शिकायत, कार्रवाई नहीं होने का आरोप
- Shiv Kumar
- 23 Oct, 2026
चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी मनीष गर्ग के कामकाज को लेकर विवाद में नई जानकारी सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखकर गर्ग के कामकाज पर शिकायत की थी। मामला वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कार्यों के बंटवारे में बदलाव से जुड़ा था। कैबिनेट सचिवालय ने इस मामले में सीधे कार्रवाई करने के बजाय दोनों पत्रों की प्राप्ति स्वीकार करने का फैसला किया। फाइल नोटिंग में कहा गया कि शिकायतें चुनाव आयोग की ओर से सामूहिक रूप से आधिकारिक संवाद के रूप में नहीं भेजी गई थीं। ऐसे में कार्रवाई करना संवैधानिक संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता था। यह जानकारी RTI कार्यकर्ता लोकेश के. बत्रा को दिए गए जवाब और संबंधित दस्तावेजों से सामने आई है।
कार्य विभाजन के आदेश पर दोनों आयुक्तों ने जताई थी आपत्ति
दस्तावेजों के मुताबिक, विवाद 28 जुलाई को जारी कार्य विभाजन के एक आदेश से जुड़ा था। आरोप था कि मनीष गर्ग ने प्रशासनिक प्रभार संभालने के कुछ ही समय बाद वरिष्ठ अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों में बदलाव का आदेश जारी कर दिया। चुनाव आयुक्तों की शिकायत के अनुसार, यह बदलाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से चर्चा और उनकी सहमति के बिना किया गया था। दोनों आयुक्तों ने यह भी कहा था कि इस तरह के निर्णय से पहले चर्चा और मंजूरी लेने के निर्देश दिए गए थे। विवेक जोशी ने यह शिकायत भी की थी कि प्रशासनिक विभाग से मांगी गई संबंधित फाइल उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। कार्य विभाजन में बदलाव को लेकर मतदाता सूची से जुड़े आईटी सिस्टम की निगरानी और जिम्मेदारियों के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठे थे। हालांकि, चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया था कि संबंधित अधिकारी के आदेश लागू नहीं किए गए और आईटी विभाग की निगरानी व्यवस्था वास्तव में नहीं हटाई गई थी।
कैबिनेट सचिवालय ने सीधे कार्रवाई को माना अनुचित
RTI से सामने आई फाइल नोटिंग के अनुसार, कैबिनेट सचिवालय में 3 और 4 अगस्त को इस मामले पर विचार किया गया। अधिकारियों ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों के पत्रों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन वे पूरे चुनाव आयोग की ओर से भेजा गया आधिकारिक पत्र नहीं थे। नोटिंग में यह भी कहा गया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज में कार्यपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। इसलिए उस स्तर पर सीधे कार्रवाई करना अनुचित माना जा सकता था। कैबिनेट सचिवालय ने दोनों आयुक्तों को पत्र मिलने की सूचना देने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को इसकी प्रतियां भेजने का निर्णय लिया। संबंधित विभागों को भी मामले की जानकारी दी गई, ताकि अधिकारी के संबंध में भविष्य में होने वाले निर्णयों के दौरान इसे रिकॉर्ड पर रखा जा सके। इस तरह शिकायत पर तत्काल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय पत्राचार और रिकॉर्ड दर्ज करने तक कदम सीमित रहे।
30 जुलाई को आदेश रद्द, मनीष गर्ग सितंबर 2024 में आयोग से जुड़े
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने कार्य विभाजन से जुड़े विवादित आदेश को रद्द कर दिया था। उन्होंने निर्देश दिया कि बदलाव पर सहमति बनने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहे। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को अपने बयान में कहा था कि संबंधित अधिकारी के कार्य विभाजन संबंधी आदेश लागू नहीं किए गए थे और आईटी विभाग पर उप चुनाव आयुक्त की निगरानी कभी वास्तव में समाप्त नहीं हुई। मनीष गर्ग हिमाचल प्रदेश कैडर के 1996 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें अगस्त 2024 में चुनाव आयोग में उप चुनाव आयुक्त नियुक्त करने की मंजूरी मिली थी और उन्होंने 2 सितंबर 2024 को पदभार संभाला था। इससे पहले वह हिमाचल प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में काम कर चुके थे। RTI से सामने आई जानकारी शिकायतों और कैबिनेट सचिवालय की प्रक्रिया पर प्रकाश डालती है, लेकिन इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि शिकायतों में लगाए गए आरोप अंतिम रूप से सही पाए गए थे।
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