नोएडा सेक्टर-126 की आग को सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने वाली पोस्ट पर केस

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नोएडा के सेक्टर-126 में दुकानों में लगी आग को सांप्रदायिक हिंसा, गोलीबारी और पांच मौतों से जोड़कर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। पुलिस ने दावे को पूरी तरह झूठा बताते हुए धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है।

नोएडा। सेक्टर-126 के रायपुर गांव में दुकानों में लगी आग को सांप्रदायिक हिंसा का रूप देकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया संदेश अब पुलिस कार्रवाई के घेरे में है। एक्स पर किए गए एक पोस्ट में जामिया मस्जिद तोड़े जाने के बाद टकराव, गोलीबारी, पांच लोगों की मौत और दुकानों में आगजनी का दावा किया गया था। गौतमबुद्धनगर पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह असत्य बताया है। पुलिस के मुताबिक, मौके पर आग लगने की घटना जरूर हुई, लेकिन वहां न तो कोई सांप्रदायिक संघर्ष हुआ और न ही गोलीबारी या सामूहिक मौत की बात सामने आई। मामले में सेक्टर-126 थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संवेदनशील सूचनाएं साझा करने से पहले उनकी पुष्टि जरूर करें।


आग की घटना को दिया गया सांप्रदायिक रंग

जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर रायपुर गांव क्षेत्र में सड़क किनारे बनी कई अस्थायी दुकानों में अचानक आग लग गई। लपटें तेजी से फैलीं और आसपास की चाय-नाश्ते की दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। दमकल की गाड़ियां और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद आग पर काबू पाया गया। तलाशी के दौरान एक व्यक्ति अचेत मिला। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। मृतक की उम्र 26 वर्ष बताई जा रही है। शुरुआती जांच में एक शेड में वेल्डिंग का काम चलने की जानकारी सामने आई है, हालांकि आग की असली वजह की जांच जारी है। परिसर में बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर मिलने से राहत और बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण रहा।


पुलिस ने दावों को बताया पूरी तरह झूठा

आग की इसी घटना को आधार बनाकर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल किया गया। पोस्ट में दावा किया गया कि मस्जिद गिराए जाने के विरोध में हिंसा भड़क गई, लोगों पर गोली चलाई गई और पांच लोगों की मौत हो गई। नोएडा पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी कर इन बातों को खारिज किया। पुलिस का कहना है कि घटना को तोड़फोड़ और सांप्रदायिक टकराव से जोड़ना तथ्यहीन है। थाना सेक्टर-126 में संबंधित सोशल मीडिया हैंडल और पोस्ट करने वालों के खिलाफ प्रासंगिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्ट का उद्देश्य धार्मिक सौहार्द बिगाड़ना और इलाके में तनाव पैदा करना हो सकता है। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है और आरोपितों की भूमिका सामने आने पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


अफवाह फैलाने वालों पर कड़ी नजर, लोगों से संयम की अपील

पुलिस ने नागरिकों से कहा है कि वे किसी भी भड़काऊ संदेश, वीडियो या दावे को बिना पुष्टि के आगे न बढ़ाएं। अधिकारियों के मुताबिक, झूठी सूचना कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचकर कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। स्थानीय स्तर पर भी पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को कहा है। आग लगने के कारण, नुकसान और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पुलिस वायरल पोस्ट की पहुंच, उसे साझा करने वाले खातों और संभावित उद्देश्य की पड़ताल कर रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि वास्तविक आग की घटना और उसके नाम पर फैलाई गई भ्रामक सामग्री के बीच फर्क साफ रखा जाए।

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