नोएडा में 85 एकड़ जमीन को लेकर ग्रामीणों का विरोध, बोले- बिना अधिग्रहण बिल्डर को जमीन नहीं देने देंगे
- Shiv Kumar
- 26 Oct, 2026
नोएडा में जमीन को लेकर प्राधिकरण और ग्रामीणों के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मोमनाथल गांव में ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। मामला गढ़ी समस्तीपुर, मोमनाथल और कोंडली बांगर गांवों की आबादी भूमि से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 85 एकड़ जमीन को बिना अधिग्रहण की उचित प्रक्रिया पूरी किए बिल्डर के पक्ष में देने की तैयारी की जा रही है। उनका दावा है कि इससे तीनों गांवों के करीब 1,500 घर प्रभावित हो सकते हैं। विरोध के दौरान ग्रामीणों ने भूटानी बिल्डर के पोस्टर जलाकर नाराजगी जताई और कहा कि वे अपनी आबादी की जमीन पर कब्जा नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए प्राधिकरण को कोई भी कदम उठाने से पहले कानूनी स्थिति का ध्यान रखना चाहिए।
28 अक्टूबर की बोर्ड बैठक से पहले जमीन का मुद्दा गरमाया
नोएडा प्राधिकरण की 28 अक्टूबर को होने वाली बोर्ड बैठक से पहले 85 एकड़ जमीन का मुद्दा चर्चा में आ गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि बैठक में जमीन से संबंधित कोई ऐसा प्रस्ताव लाया जा सकता है, जिससे गढ़ी समस्तीपुर, मोमनाथल और कोंडली बांगर की आबादी भूमि प्रभावित हो। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि प्राधिकरण ग्रामीणों के हितों की अनदेखी कर बिल्डर को फायदा पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बोर्ड बैठक के एजेंडे में इस जमीन को लेकर प्रस्ताव शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि उनकी आबादी की जमीन से जुड़े किसी भी फैसले से पहले प्रभावित परिवारों का पक्ष सुना जाए और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। उनका कहना है कि इस मामले में जल्दबाजी से बड़ी संख्या में परिवारों के सामने घर और जमीन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
तीन गांवों के करीब 1500 घर प्रभावित होने की आशंका
ग्रामीणों के मुताबिक, विवादित जमीन गढ़ी समस्तीपुर, मोमनाथल और कोंडली बांगर गांवों की आबादी से जुड़ी है। उनका दावा है कि करीब 85 एकड़ जमीन को लेकर प्रस्तावित कार्रवाई से लगभग 1,500 घरों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि आबादी की जमीन पर उनके परिवार लंबे समय से रह रहे हैं और वे इसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी आशंका के चलते मोमनाथल गांव में लोगों ने प्रदर्शन किया और भूटानी बिल्डर के पोस्टर जलाकर विरोध जताया। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा नहीं होने देंगे। उन्होंने प्राधिकरण से मांग की कि प्रभावित परिवारों की स्थिति और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। हालांकि, कितने घर वास्तव में प्रभावित होंगे और जमीन को लेकर प्राधिकरण की योजना क्या है, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में प्राधिकरण का पक्ष सामने आने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का दिया हवाला
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि जमीन से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए नोएडा प्राधिकरण को कोई भी निर्णय लेते समय न्यायिक प्रक्रिया और ग्रामीणों के अधिकारों का ध्यान रखना चाहिए। ग्रामीणों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों की आपत्तियों को सुने बिना जमीन को लेकर आगे बढ़ना उचित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि बोर्ड बैठक में इस मामले पर फैसला लेने से पहले कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए और ग्रामीणों को भरोसे में लिया जाए। फिलहाल, ग्रामीणों का विरोध जमीन पर संभावित कार्रवाई की आशंका को लेकर है। प्राधिकरण की ओर से प्रस्ताव, जमीन की स्थिति और ग्रामीणों के आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बोर्ड बैठक में इस मुद्दे पर क्या निर्णय होता है, इस पर प्रभावित गांवों के लोगों की नजर रहेगी।
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