ग्रेटर नोएडा में बिग बास्केट राइडरों की हड़ताल, 48 घंटे से कामकाज ठप; कम भुगतान और बीमा पर उठाए सवाल
- Shiv Kumar
- 28 Oct, 2026
ग्रेटर नोएडा स्थित बिग बास्केट के गोदाम पर राइडरों की हड़ताल का मामला सामने आया है। राइडरों का दावा है कि वे पिछले 48 घंटे से काम बंद कर विरोध जता रहे हैं। उनकी मुख्य शिकायत सामान पहुंचाने के लिए बढ़ाई गई दूरी और प्रति ऑर्डर मिलने वाला कम भुगतान है। राइडरों का कहना है कि पहले उन्हें 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में डिलीवरी मिलती थी, लेकिन अब 10 से 15 किलोमीटर दूर तक सामान पहुंचाने के लिए भेजा जा रहा है। इसके बदले कई बार महज 25 रुपये मिलते हैं, जिससे पेट्रोल और वाहन के रखरखाव का खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। राइडरों ने दुर्घटना बीमा और महंगे सामान के नुकसान की भरपाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दुर्घटना या सामान क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में आर्थिक नुकसान का बोझ उन्हें खुद उठाना पड़ता है। राइडरों की मांग है कि कंपनी उनकी समस्याओं का समाधान करे और कामकाज से जुड़ी शर्तों में बदलाव करे।
2 से 3 किलोमीटर की जगह 10 से 15 किलोमीटर दूर तक डिलीवरी का आरोप
हड़ताल कर रहे राइडरों के मुताबिक, पहले उन्हें सामान पहुंचाने के लिए लगभग 2 से 3 किलोमीटर के दायरे में ऑर्डर मिलते थे। अब कई बार उन्हें 10 से 15 किलोमीटर दूर तक डिलीवरी करने के लिए भेजा जा रहा है। राइडरों का कहना है कि दूरी बढ़ने के बावजूद भुगतान में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके अनुसार, कुछ ऑर्डर के लिए महज 25 रुपये मिलते हैं। इतनी कम राशि में पेट्रोल, वाहन की मरम्मत और रखरखाव का खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है। राइडरों ने मांग की है कि डिलीवरी की दूरी और भुगतान के बीच उचित संतुलन बनाया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में अधिक समय और ईंधन खर्च करने के बावजूद उनकी कमाई प्रभावित हो रही है। इसी समस्या के विरोध में उन्होंने काम बंद करने का फैसला लिया है।
महंगे सामान के नुकसान और दुर्घटना बीमा को लेकर भी नाराजगी
राइडरों ने महंगे उत्पादों की डिलीवरी के दौरान होने वाले नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि आईफोन और सोने के सिक्कों जैसे महंगे सामान को पहुंचाते समय यदि दुर्घटना हो जाए या उत्पाद क्षतिग्रस्त हो जाए, तो नुकसान की भरपाई उनसे कराई जाती है। राइडरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने मांग की है कि सामान की सुरक्षा, क्षति और नुकसान की जिम्मेदारी तय करने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए। इसके साथ ही राइडरों ने दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि डिलीवरी के दौरान उन्हें लगातार सड़क पर रहना पड़ता है और लंबी दूरी तय करने से दुर्घटना का जोखिम बढ़ता है। ऐसे में बीमा सुरक्षा और आपात स्थिति में सहायता की व्यवस्था जरूरी है। इन मांगों को लेकर राइडर कंपनी प्रबंधन से समाधान की उम्मीद कर रहे हैं।
काम करने की सुविधा बंद होने से कमाई पर असर
राइडरों के मुताबिक, हड़ताल के दौरान उनकी काम करने की सुविधा भी बंद कर दी गई है, जिसके कारण वे ऑर्डर नहीं ले पा रहे हैं। उनका कहना है कि पहले से ही भुगतान और डिलीवरी की दूरी को लेकर परेशानी है, वहीं काम करने की सुविधा बंद होने से रोजाना की कमाई भी प्रभावित हो रही है। राइडरों की प्रमुख मांगों में डिलीवरी की दूरी कम करना, प्रति ऑर्डर उचित भुगतान देना, महंगे सामान के नुकसान को लेकर स्पष्ट नियम बनाना और दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराना शामिल है। हालांकि, इस मामले में कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल राइडरों का विरोध जारी रहने से गोदाम के कामकाज और डिलीवरी व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। आगे कंपनी प्रबंधन की प्रतिक्रिया और राइडरों के साथ बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा कि हड़ताल कब समाप्त होगी और उनकी मांगों पर क्या निर्णय लिया जाएगा।
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