नोएडा के सेक्टर-105 में बनेगा इंटीग्रेटेड ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स, 12, 596 वर्गमीटर जमीन का होगा आवंटन

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नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-105 में 12,596.64 वर्गमीटर जमीन पर इंटीग्रेटेड ऑटोमोबाइल कॉम्प्लेक्स बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। निवेशक का चयन ई-बिडिंग से होगा। योजना में चार गुना एफएआर, 20 मीटर ऊंचाई सीमा और निर्माण पूरा करने के लिए पांच साल की समयसीमा तय की गई है।

नोएडा के सेक्टर-105 में ऑटोमोबाइल कंपनियों के शोरूम के लिए इंटीग्रेटेड कॉम्प्लेक्स विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है। नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में 12,596.64 वर्गमीटर जमीन पर इस कॉम्प्लेक्स को बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इसके लिए पूरी जमीन एक ही भूखंड के रूप में एक कंपनी को आवंटित की जाएगी। निवेशक का चयन ई-बिडिंग के जरिए होगा। कॉम्प्लेक्स में अलग-अलग वाहन कंपनियों के शोरूम के साथ पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। योजना के तहत पूरी परियोजना की योजना बनाने से लेकर निर्माण, संचालन और रखरखाव तक की जिम्मेदारी एक ही लीजधारक की होगी। जमीन को अलग-अलग भूखंडों में बांटकर स्वतंत्र व्यावसायिक परिसर या पार्किंग प्लॉट बनाने की अनुमति नहीं होगी। इस परियोजना का उद्देश्य सेक्टर-105 में वाहन कंपनियों के शोरूम और उनसे जुड़ी सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित करना है।


बोर्ड बैठक में मंजूरी से पहले तैयार की गई योजना

नोएडा प्राधिकरण ने इस योजना का प्रस्ताव पहली बार 3 अक्टूबर 2025 को हुई बोर्ड बैठक में रखा था। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को योजना तैयार करने के लिए एक समिति बनाई गई। समिति ने 25 अगस्त से 18 सितंबर 2026 तक संभावित निवेशकों से सुझाव और आपत्तियां मांगीं। इन सुझावों और आपत्तियों के आधार पर योजना की शर्तें तैयार की गईं। अब बोर्ड बैठक में इन शर्तों को मंजूरी मिल गई है। योजना के तहत जमीन एक ही भूखंड के रूप में आवंटित होगी और निवेशक का चयन ई-बिडिंग के माध्यम से किया जाएगा। इससे परियोजना के विकास, निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी एक लीजधारक के पास रहेगी।


चार गुना एफएआर के साथ 20 मीटर तक ऊंचाई की अनुमति

योजना के तहत आवंटित भूखंड के क्षेत्रफल के चार गुना तक निर्माण किया जा सकेगा। हालांकि, कॉम्प्लेक्स में भवनों की अधिकतम ऊंचाई 20 मीटर निर्धारित की गई है। पार्किंग की व्यवस्था भी परिसर के भीतर ही करनी होगी। कॉम्प्लेक्स में अलग-अलग वाहन कंपनियों के शोरूम के साथ ग्राहकों और अन्य लोगों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। योजना की शर्तों के अनुसार, जमीन को अलग-अलग भूखंडों में बांटकर स्वतंत्र व्यावसायिक परिसर या पार्किंग प्लॉट नहीं बनाए जा सकेंगे। पूरी परियोजना को एकीकृत रूप में विकसित करने की जिम्मेदारी चयनित कंपनी की होगी।


ऑटोमोबाइल कारोबार में 10 साल का अनुभव जरूरी

योजना में बोली लगाने वाली कंपनी के पास ऑटोमोबाइल डीलरशिप कारोबार का कम से कम 10 साल का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी का कम से कम तीन शहरों में लगातार पांच साल तक कारोबार होना जरूरी है। कंपनियों का समूह भी मिलकर बोली लगा सकेगा। इन शर्तों के जरिए ऐसे निवेशकों को योजना में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें वाहन कारोबार का पर्याप्त अनुभव हो। निवेशक के चयन के बाद लीज डीड की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लीज डीड होने के बाद अधिकतम पांच साल के भीतर पूरे कॉम्प्लेक्स का निर्माण पूरा करके ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना होगा।


तीन चरणों में हो सकेगा निर्माण

कॉम्प्लेक्स का निर्माण तीन चरणों में किया जा सकेगा। हालांकि, पहले चरण का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट तीन साल के भीतर लेना अनिवार्य होगा। पूरी परियोजना का निर्माण अधिकतम पांच साल में पूरा करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना होगा। परियोजना में निर्माण से लेकर संचालन और रखरखाव तक की जिम्मेदारी एक ही लीजधारक की रहेगी। इससे सेक्टर-105 में अलग-अलग वाहन कंपनियों के शोरूम, पार्किंग और अन्य जरूरी सुविधाओं को एक ही परिसर में विकसित करने की योजना है। 

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