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पंजाब में AAP को बड़ा झटका, तीन विधायक BJP में शामिल; 2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

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पंजाब में आम आदमी पार्टी के तीन विधायकों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हुए इस दलबदल ने भगवंत मान सरकार और AAP संगठन के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

नई दिल्ली। पंजाब में आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी से अलग हुए तीन विधायक सोमवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में भगवा दल में शामिल हो गए। इनमें सनौर से हरमीत सिंह पठानमाजरा, समाना से चेतन सिंह जौरामाजरा और अमृतसर नॉर्थ से पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह शामिल हैं। तीनों नेताओं का भाजपा में जाना ऐसे समय हुआ है जब पंजाब की सियासत 2027 के चुनाव की तैयारी में तेजी पकड़ रही है। भाजपा इसे अपने विस्तार की बड़ी सफलता बता रही है, जबकि AAP ने इसे दल-बदल की राजनीति करार दिया है। इस घटनाक्रम से मुख्यमंत्री भगवंत मान की पार्टी के भीतर मतभेद और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।


एक दिन पहले दिया इस्तीफा, अगले ही दिन भाजपा में प्रवेश

हरमीत सिंह पठानमाजरा और चेतन सिंह जौरामाजरा ने रविवार को AAP की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं ने विधानसभा सदस्यता से भी त्यागपत्र देने की प्रक्रिया शुरू की। कुंवर विजय प्रताप सिंह पहले ही पार्टी नेतृत्व से दूरी बना चुके थे और उन्हें निलंबन का सामना करना पड़ा था। सोमवार को उन्होंने भी विधायक पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। जानकारी के मुताबिक, तीनों नेता भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुए। पंजाब भाजपा अध्यक्ष और दिल्ली संगठन के नेताओं ने उनका स्वागत किया। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इन नेताओं के अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव को चुनावी तैयारी में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, आगामी चुनाव में टिकट को लेकर पार्टी की ओर से अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

AAP छोड़ने वाले नेताओं और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद लंबे समय से चर्चा में थे। दोनों विधायकों का इस्तीफा उस समय आया जब आम आदमी पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की। राजनीतिक जानकार इसे टिकट बंटवारे, संगठनात्मक असंतोष और स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं। कुंवर विजय प्रताप सिंह 2022 के चुनाव से पहले AAP के प्रमुख चेहरों में गिने जाते थे। पूर्व पुलिस अधिकारी होने के कारण पार्टी ने उन्हें कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर मुखर नेता के रूप में पेश किया था। अब उनका भाजपा में जाना AAP के लिए केवल संख्या का नुकसान नहीं, बल्कि उसके पुराने चुनावी नैरेटिव को भी चुनौती माना जा रहा है।


AAP ने भाजपा पर साधा निशाना, दल-बदल को बताया अवसरवाद

तीनों विधायकों के भाजपा में शामिल होने के बाद पंजाब AAP ने केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा हमला बोला। प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा दूसरे दलों से निकाले या असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लेकर पंजाब में आधार बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने भी भाजपा की सदस्यता अभियान शैली पर सवाल उठाए। AAP नेताओं का कहना है कि जनता दल-बदल की राजनीति को समझती है और इसका फैसला चुनाव में करेगी। दूसरी ओर भाजपा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि पंजाब के प्रभावशाली नेता लगातार उसके साथ आ रहे हैं क्योंकि वे राज्य सरकार की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं। दोनों दलों के बीच बयानबाजी से चुनावी तापमान अभी से बढ़ गया है।

पंजाब में भाजपा लंबे समय से अपने संगठन का विस्तार करने और राज्य की राजनीति में स्वतंत्र ताकत बनने की कोशिश कर रही है। तीन विधायकों का साथ मिलना उसे विधानसभा चुनाव से पहले मनोवैज्ञानिक बढ़त दे सकता है, खासकर उन सीटों पर जहां ये नेता पहले से सक्रिय रहे हैं। हालांकि, दलबदल के बाद मतदाताओं का रुख किस तरफ जाएगा, यह स्थानीय समीकरणों पर निर्भर करेगा। AAP के सामने अब संगठन को एकजुट रखने, असंतुष्ट नेताओं को साधने और सरकार के कामकाज को चुनावी मुद्दा बनाने की चुनौती है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा आने वाले दिनों में पंजाब के कुछ और नेताओं से संपर्क कर सकती है। ऐसे में यह घटनाक्रम राज्य की चुनावी राजनीति में बड़े फेरबदल की शुरुआत बन सकता है।

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