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अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन, ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के 2 साल बाद ही क्यों हो रहे चुनाव?

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अमेरिका के मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की दिशा तय कर सकते हैं। सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को प्रतिनिधि सभा में बढ़त और सीनेट में भी मुकाबला मजबूत करने का संकेत मिला है।

वाशिंगटन। अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा बन गए हैं। सभी 435 सीटों वाली प्रतिनिधि सभा और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान होगा। रिपब्लिकन पार्टी फिलहाल दोनों सदनों में मामूली बहुमत के साथ ट्रंप के एजेंडे को आगे बढ़ा रही है, लेकिन चुनावी माहौल तेजी से बदलता दिख रहा है। कई सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करने की स्थिति में बताया गया है। सीनेट में भी पार्टी पहले के अनुमान से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही है। नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप अगले दो वर्षों तक बिना बड़े अवरोध के फैसले लागू करेंगे या कांग्रेस उनके लिए राजनीतिक रोकथाम की दीवार खड़ी कर देगी।


प्रतिनिधि सभा पर डेमोक्रेट्स की नजर, सीनेट में भी बढ़ी उम्मीद

जानकारी के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी को प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए जरूरी 218 सीटों का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। कई प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में पार्टी उम्मीदवार रिपब्लिकन प्रत्याशियों से आगे चल रहे हैं। अगर यह अनुमान सही निकला तो ट्रंप प्रशासन के बजट, नियुक्तियों और नीतिगत फैसलों की कांग्रेस में कड़ी जांच शुरू हो सकती है। शक्तिशाली समितियां सरकारी कामकाज, कथित भ्रष्टाचार और प्रशासन से जुड़े विवादों पर सुनवाई कर सकेंगी। सीनेट का मुकाबला ज्यादा पेचीदा है, मगर यहां भी डेमोक्रेट्स ने अपनी स्थिति मजबूत की है। चार सीटों का शुद्ध फायदा पार्टी को ऊपरी सदन पर नियंत्रण दिला सकता है। इससे ट्रंप के न्यायिक नियुक्तियों, खासकर सुप्रीम कोर्ट से जुड़े फैसलों पर बड़ा असर पड़ेगा।


राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतिम दौर में रिपब्लिकन उम्मीदवारों के पक्ष में रैलियां और फोन के जरिये प्रचार तेज किया है। हालांकि कंसास और आयोवा की प्रस्तावित रैलियां रद्द होने के बाद उनका प्रत्यक्ष अभियान सीमित रहा। चुनावी सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति की लोकप्रियता भी दबाव में दिखाई दे रही है। नौ अक्टूबर से 28 अक्टूबर के बीच हुए सर्वेक्षणों के औसत में ट्रंप को 38.4 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिला, जबकि 60.1 प्रतिशत ने उनके कामकाज को नापसंद किया। स्वतंत्र मतदाताओं का रुझान डेमोक्रेट्स की ओर जाता दिख रहा है। एक सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत स्वतंत्र मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि रिपब्लिकन के पक्ष में 39 प्रतिशत मतदाता थे।


जीवनयापन की लागत, टैरिफ और विदेश नीति बने चुनावी मुद्दे

इस चुनाव में मतदाताओं की नाराजगी केवल पार्टी राजनीति तक सीमित नहीं है। बढ़ती जीवनयापन लागत, आयात शुल्क और ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति ने अभियान का रुख बदल दिया है। ईरान युद्ध को लेकर असंतोष और महंगाई का दबाव डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के लिए बड़ा मुद्दा बना है। लैटिनो मतदाताओं के एक हिस्से में आव्रजन नीति को लेकर प्रतिक्रिया भी सामने आई है। स्वतंत्र मतदाताओं के बीच कई लोग अपने वोट को राष्ट्रपति के समर्थन के बजाय बदलाव की मांग के रूप में देख रहे हैं। डेमोक्रेट्स इसी भावना को मतदान केंद्र तक ले जाने की कोशिश में हैं। रिपब्लिकन खेमे का जोर ट्रंप की आर्थिक नीतियों, सीमा सुरक्षा और प्रशासनिक फैसलों को जनादेश में बदलने पर है।

मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक जीत का मतलब यह नहीं होगा कि ट्रंप की कार्यकारी शक्तियां तुरंत खत्म हो जाएंगी। राष्ट्रपति के पास वीटो का अधिकार रहेगा और सीनेट में कई बड़े विधेयकों के लिए 60 मतों की जरूरत होगी। विदेश नीति के मामले में भी व्हाइट हाउस के पास व्यापक अधिकार बने रहेंगे। फिर भी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में विपक्षी बहुमत जांच, बजट और नियुक्तियों के जरिये प्रशासन पर दबाव बढ़ा सकता है। डेमोक्रेट्स दोनों सदन जीतते हैं तो ट्रंप सरकार के खिलाफ सुनवाइयों और टकराव का दौर तेज होने की संभावना है। रिपब्लिकन दोनों सदनों में बहुमत बचा लेते हैं तो इसे ट्रंप की नीतियों पर जनता की मुहर माना जाएगा और उनका राजनीतिक प्रभाव और मजबूत हो सकता है।


नतीजे ट्रंप की विरासत और 2028 की राजनीति का संकेत देंगे

अमेरिकी राजनीति में इन चुनावों का असर मौजूदा कांग्रेस से कहीं आगे तक जाएगा। रिपब्लिकन जीत ट्रंप के मैगा आंदोलन को अगले चरण में ले जा सकती है और पार्टी के भीतर राष्ट्रपति की पकड़ मजबूत करेगी। इसके उलट डेमोक्रेटिक बढ़त को ट्रंप की सत्ता पर पहला बड़ा संस्थागत अंकुश माना जाएगा। प्रतिनिधि सभा हाथ से निकलने पर प्रशासन को जांच समितियों और बजट संबंधी गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। सीनेट गंवाने की स्थिति में न्यायपालिका में रूढ़िवादी नियुक्तियों की प्रक्रिया धीमी या बाधित हो सकती है। हालांकि राष्ट्रपति की वीटो शक्ति के कारण डेमोक्रेट्स के लिए सभी नीतियों को पलटना आसान नहीं होगा। चुनाव परिणाम ट्रंप की लोकप्रियता, उनकी नीतियों और 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआती दिशा पर भी असर डालेंगे।

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