मध्य प्रदेश में FCI के सरकारी चावल का करोड़ों का घोटाला: एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा राशन निजी मिल में मिला, SIT जांच शुरू।
मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजा FCI का सरकारी चावल निजी राइस मिल में पहुंचने का मामला सामने आया। पुलिस ने जांच शुरू कर 4 लोगों को गिरफ्तार किया है।
- Babli Ansari
- 11 Jul, 2026
मध्य प्रदेश में एथेनॉल उत्पादन के लिए भेजे गए सरकारी सब्सिडी वाले चावल की कथित हेराफेरी का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) से एथेनॉल प्लांट के लिए भेजा गया चावल रास्ते में ही निजी राइस मिलों की ओर मोड़ दिया गया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि सरकारी चावल को दोबारा मिलिंग प्रक्रिया में शामिल कर सरकारी एजेंसियों को ही ऊंचे दाम पर बेचा जा रहा था।
एथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंची चावल की खेप
जांच के अनुसार, FCI डिपो से छिंदवाड़ा स्थित एथेनॉल प्लांट के लिए रवाना किए गए चावल से लदे ट्रकों में से एक ट्रक अपनी निर्धारित मंजिल तक पहुंचने के बजाय बालाघाट के वारासिवनी स्थित एक निजी राइस मिल में मिला। ट्रक में लगभग 242 क्विंटल सरकारी चावल मौजूद था। पुलिस का मानना है कि यह केवल एक खेप का मामला नहीं है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
सरकारी चावल को दोबारा सरकार को बेचने का आरोप
SIT की शुरुआती जांच में सामने आया है कि एथेनॉल निर्माण के लिए कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया सरकारी चावल निजी मिलों में भेजा जाता था। इसके बाद उसे कस्टम मिलिंग प्रक्रिया के जरिए दोबारा सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल कर सरकार को ही अधिक कीमत पर बेचे जाने की आशंका है। जांच एजेंसियां इस पूरे रैकेट से सरकार को हुए आर्थिक नुकसान का भी आकलन कर रही हैं।
चार गिरफ्तार, कई और लोग जांच के दायरे में
पुलिस ने इस मामले में एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े प्रतिनिधि, ट्रांसपोर्टर, ट्रक चालक और राइस मिल संचालक समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। कई ट्रकों को भी जब्त किया गया है और दर्जनों लोगों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
एथेनॉल नीति पर भी उठे सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) को बढ़ावा दे रही है। एथेनॉल उत्पादन के लिए सरकारी चावल उपलब्ध कराने की नीति के दुरुपयोग की आशंका ने निगरानी व्यवस्था और आपूर्ति प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस कथित गड़बड़ी में किन-किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
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