मौत की धमकी भी नहीं रोक पाएगी! जेल हो या फांसी, दिसंबर में हर हाल में लौटूंगी'... शेख हसीना का बड़ा ऐलान

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बांग्लादेश लौटने पर अड़ीं शेख हसीना, बोलीं- फांसी मंजूर, वापसी तय, 'मेरे लोगों ने बुलाया है |

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 तक हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी, चाहे उन्हें जेल जाना पड़े, फांसी का सामना करना पड़े या जान का खतरा ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह उनका अपना है और वह अपने देश के लोगों की पुकार पर वापस जाना चाहती हैं। हसीना ने स्पष्ट किया कि वह लौटकर अदालत का सामना करेंगी और कानून की प्रक्रिया से गुजरेंगी। उनके इस बयान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

'डरकर नहीं जी सकती'

अपने बयान में शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा, गिरफ्तारी या सजा का पूरा अंदेशा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने का फैसला नहीं बदलेंगी। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें जेल भेजा जाता है या फांसी भी होती है, तब भी वह अपने देश लौटने से पीछे नहीं हटेंगी। हसीना का कहना है कि देश छोड़कर हमेशा के लिए रहना उनका उद्देश्य कभी नहीं था और वह अपने समर्थकों तथा जनता के बीच वापस जाना चाहती हैं।

वापसी से पहले बढ़ा राजनीतिक तनाव

शेख हसीना के इस ऐलान के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। उनकी पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगा हुआ है और उनके कई नेता पहले से ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। हाल के दिनों में राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद राजनीतिक समीकरण भी तेजी से बदले हैं। ऐसे माहौल में हसीना की वापसी को बांग्लादेश की राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वह दिसंबर में लौटती हैं तो देश में राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।

दुनिया की नजरें अब दिसंबर पर

फिलहाल शेख हसीना भारत में रह रही हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि वापसी का फैसला अंतिम है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि दिसंबर में उनकी वापसी किस तरह होती है और बांग्लादेश सरकार उनके खिलाफ क्या कदम उठाती है। यदि वह लौटती हैं तो उन्हें अदालत में पेश होना पड़ सकता है और लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। वहीं उनके समर्थक इसे लोकतांत्रिक अधिकार बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक टकराव का नया अध्याय मान रहे हैं। आने वाले महीनों में बांग्लादेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र यही मुद्दा रहने की संभावना है।

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