रिजिजू की अपील पर राहुल का साफ इनकार! संसद में क्यों अटक गया खेल?

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संसद के गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात कर परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर समर्थन मांगा। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने साफ कहा कि पहले आरोपों पर चर्चा और गृह मंत्री के बयान के बाद ही सदन आगे बढ़ेगा।

संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी गतिरोध के बीच सरकार ने विपक्ष से बातचीत कर रास्ता निकालने की कोशिश की। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में सरकार ने परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का सहयोग मांगा, ताकि लंबित विधायी कामकाज आगे बढ़ सके। लेकिन बैठक के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी और संसद का गतिरोध बरकरार रहा।

राहुल गांधी ने रखी दो बड़ी शर्तें

सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्ताव को तत्काल स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब तक राम मंदिर में कथित चंदा चोरी के मामले पर संसद में चर्चा नहीं होती और 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई पर गृह मंत्री अमित शाह सदन में बयान नहीं देते, तब तक विपक्ष सदन को सामान्य रूप से चलाने में सहयोग नहीं करेगा। कांग्रेस का कहना है कि इन मुद्दों पर पहले सरकार को जवाब देना चाहिए, उसके बाद ही अन्य विधायी कार्यों पर चर्चा हो सकती है।

सरकार की नजर अहम विधेयकों पर

बताया जा रहा है कि सरकार मौजूदा सत्र में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन को आगे बढ़ाना चाहती है। इसी उद्देश्य से रिजिजू ने विपक्ष से बातचीत की। हालांकि बैठक के बावजूद कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। सरकार का मानना है कि संसद का लगातार ठप रहना महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को प्रभावित कर रहा है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा से बच रही है।

बैठक के बाद भी नहीं बदले हालात

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद किरण रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी चर्चा की। इसके बावजूद दोनों सदनों में गतिरोध जारी रहा। विपक्ष लगातार नारेबाजी करता रहा, जबकि सरकार ने विपक्ष पर संसद का समय बर्बाद करने का आरोप लगाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते पर नहीं पहुंचते, तब तक मानसून सत्र में टकराव जारी रह सकता है।

अब सबकी नजर अगले कदम पर

मानसून सत्र के अब सीमित दिन बचे हैं और सरकार अपने प्रमुख विधेयकों को पारित कराना चाहती है। वहीं विपक्ष अपने उठाए गए मुद्दों पर चर्चा और सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब की मांग पर अड़ा हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच कोई नया समझौता होता है या संसद का गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

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