महुआ मोइत्रा पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट! हाईकोर्ट के आदेश को दी चुनौती
- Babli Ansari
- 06 Aug, 2026
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप वाले मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। जानकारी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने उन्हें फिलहाल अंतरिम राहत तो दी थी, लेकिन जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अदालत ने साफ कहा था कि पुलिस कानून के मुताबिक जांच जारी रख सकती है और महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को दोपहर 3 बजे जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। इसी आदेश के खिलाफ अब वह शीर्ष अदालत पहुंची हैं। सुनवाई अगले हफ्ते होने की संभावना जताई जा रही है।
हाईकोर्ट के आदेश पर आपत्ति
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश ने इस मामले में नई कानूनी दिशा तय कर दी थी। न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ ने महुआ मोइत्रा को यह छूट दी थी कि फिलहाल उनके खिलाफ कोई कठोर कदम न उठाया जाए, लेकिन साथ ही जांच एजेंसी को अपना काम जारी रखने की अनुमति भी दे दी थी। आदेश में यह भी कहा गया था कि तय तारीख पर पेशी जरूरी होगी। सूत्रों के मुताबिक, इसी हिस्से को चुनौती देते हुए महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका तर्क है कि अंतरिम संरक्षण के बावजूद जांच जारी रखने और व्यक्तिगत पेशी का निर्देश कानूनी तौर पर दोबारा देखे जाने योग्य है।
मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी दायरा
यह विवाद उस टिप्पणी से जुड़ा है, जिसे लेकर धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया गया और नादिया जिले के होगलबेरिया थाने में केस दर्ज हुआ। अदालत से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने पुलिस को जांच आगे बढ़ाने की छूट दी, लेकिन यह भी कहा कि जांच के नाम पर उत्पीड़न या मनमानी नहीं होनी चाहिए। इसी के साथ पुलिस को यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि पेशी के दौरान कोई बाधा या हमला न हो। अदालत के रुख से साफ है कि वह जांच और सुरक्षा, दोनों पहलुओं को साथ-साथ देख रही है। अब शीर्ष अदालत में मामला पहुंचने से इस विवाद का दायरा और बड़ा हो गया है।
अब नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर
इस मामले की सुनवाई अगले हफ्ते हो सकती है, और उसी पर अब पूरे राजनीतिक और कानूनी हलके की नजर टिक गई है। महुआ मोइत्रा पहले भी अपने तीखे बयानों और अदालतों में चल रहे मामलों को लेकर चर्चा में रही हैं, ऐसे में इस याचिका को तृणमूल की सियासी रणनीति और कानूनी बचाव, दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी तरफ, जांच एजेंसी के लिए भी हाईकोर्ट का आदेश अहम है क्योंकि उसे तय तारीख पर पेशी कराकर आगे की कार्रवाई का रास्ता मिला हुआ है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश में कोई बदलाव करता है, तो मामले की दिशा बदल सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें शीर्ष अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
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