छात्र आंदोलन पर संसद में चर्चा को तैयार सरकार, शाह देंगे जवाब: किरेन रिजिजू
- Babli Ansari
- 10 Aug, 2026
नई दिल्ली। छात्र आंदोलनों, पेपर लीक और जंतर-मंतर से लेकर रांची तक चले प्रदर्शनों को लेकर संसद में सियासी टकराव तेज हो गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने साफ कहा है कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है और गृह मंत्री अमित शाह खुद लोकसभा में जवाब देंगे। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब विपक्ष लगातार पुलिस कार्रवाई, परीक्षा अनियमितताओं और छात्रों के साथ कथित सख्ती को लेकर सरकार को घेर रहा है। संसद परिसर में गरम माहौल के बीच सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस बहस से पीछे नहीं हटेगी, लेकिन चर्चा उसकी तय प्रक्रिया के भीतर ही होगी।
सरकार की पेशकश और विपक्ष का दबाव
सूत्रों और संसद में हुई बहस के मुताबिक, सरकार ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में यह रुख रखा कि छात्र आंदोलन और उससे जुड़ी घटनाओं पर खुली चर्चा हो सकती है। किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्ष हंगामा करके सरकार की तरफ से आने वाले जवाब से बच नहीं सकता। उनका कहना था कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में सरकार का पक्ष रखेंगे। दूसरी तरफ कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सांसदों ने मांग की है कि पुलिस कार्रवाई पर सीधे गृह मंत्री ही बयान दें। विपक्ष का आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बल प्रयोग हुआ और सरकार सवालों से बच रही है। इसी खींचतान के चलते सोमवार को संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।
जंतर-मंतर से रांची तक फैला विरोध
यह विवाद सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। जंतर-मंतर पर हुए 'संसद चलो' मार्च से शुरू हुआ असंतोष अब झारखंड तक फैल चुका है, जहां रांची में छात्र और अभ्यर्थी परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ सड़क पर हैं। कई रिपोर्टों के मुताबिक, जेपीएससी और जेएसएससी की भर्तियों में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च भी किया और कई जगह बैरिकेड तोड़े गए। झारखंड में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। यही वजह है कि आंदोलन अब केवल एक परीक्षा विवाद नहीं, बल्कि भर्ती व्यवस्था पर भरोसे की लड़ाई बन गया है।
अब संसद से क्या निकल सकता है
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर सरकार चर्चा की तारीख और नियमों पर सहमत रहती है, तो यह मामला आने वाले दिनों में दोनों सदनों में और तेज होगा। विपक्ष चाहता है कि गृह मंत्री के साथ-साथ शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून-व्यवस्था और संस्थागत प्रक्रिया का मसला बताकर सीमित दायरे में रखने की कोशिश कर रहा है। छात्रों के बीच भी बेचैनी साफ दिख रही है, क्योंकि कई प्रदर्शनकारी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। रांची और दिल्ली के आंदोलन ने सरकार पर दबाव बढ़ाया है और संसद में होने वाली अगली बहस इस पूरे मुद्दे की दिशा तय कर सकती है।
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