योगी के गढ़ गोरखपुर में BJP का बड़ा बदलाव? नए चेहरों की एंट्री तय!
- Babli Ansari
- 11 Aug, 2026
लखनऊ। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी तेज होते ही भाजपा ने उत्तर प्रदेश के संगठनात्मक जिलों में नई टीमों की कवायद और तेज कर दी है। गोरखपुर महानगर, हाथरस, अंबेडकर नगर, देवरिया, चंदौली और वाराणसी जैसे जिलों में लंबे समय से लटकी घोषणा अब जल्द होने की संभावना है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक कई जगह मौजूदा इकाइयों का कार्यकाल आगे खिसका हुआ था, जिससे सांगठनिक कामकाज धीमा पड़ रहा था। अब प्रदेश नेतृत्व ने नीचे से ऊपर तक ढांचे को कसने का फैसला किया है। इसी वजह से नए नामों पर मंथन तेज है और स्थानीय स्तर पर सिफारिशों का दौर भी बढ़ गया है।
कई जिलों में पुराने पेंच, अब नई सूची पर जोर
जानकारी के मुताबिक भाजपा ने प्रदेश को 98 संगठनात्मक जिलों में बांटा है और कई चरणों में जिला अध्यक्षों की घोषणा की थी, लेकिन कुछ जिलों में पैनल तय होने के बाद भी टीम पूरी नहीं हो सकी। गोरखपुर महानगर, देवरिया, चंदौली, हाथरस और अंबेडकर नगर जैसे इलाकों में नई टीम को लेकर खासा इंतजार बना हुआ था। पार्टी संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के बाद अब फोकस बूथ से लेकर मंडल और जिला स्तर तक की मशीनरी को सक्रिय करने पर है। इसी क्रम में उन चेहरों को तरजीह दी जा सकती है, जो जमीनी पकड़ रखते हों और हाल के अभियानों में सक्रिय रहे हों।
प्रदेश इकाई के पुनर्गठन के बाद अब क्षेत्रीय टीमों और मोर्चों पर भी काम तेज हो गया है। पार्टी रणनीति यह है कि हर जिले में ऐसे पदाधिकारी सामने लाए जाएं जो चुनावी तैयारियों को नीचे तक ले जा सकें। सूत्रों के मुताबिक जिन जिलों में नई टीम की घोषणा रुकी हुई थी, वहां संगठनात्मक कामकाज पर असर भी दिख रहा था, खासकर बैठकों, सदस्यता अभियान और स्थानीय समन्वय में। अब प्रयास है कि अगले कुछ दिनों में ज्यादातर लंबित इकाइयों को मंजूरी दे दी जाए, ताकि मिशन-2027 के लिए संदेश साफ जाए कि भाजपा पूरी तैयारी के साथ मैदान में है।
मिशन-2027 को ध्यान में रखकर संगठन को कसने की तैयारी
पार्टी नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव सिर्फ सरकार की लोकप्रियता पर नहीं, बल्कि संगठन की सक्रियता पर भी लड़ा जाएगा। इसी वजह से भाजपा लगातार अपने सांगठनिक ढांचे में नई ऊर्जा भरने की कोशिश में है। हाल के महीनों में राज्य स्तर पर जिम्मेदारियों का बंटवारा, क्षेत्रीय संयोजकों की भूमिका और मोर्चों की सक्रियता बढ़ाने जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। गोरखपुर भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद अहम केंद्र है, इसलिए यहां की संगठनात्मक टीम पर सभी की नजरें टिकी हैं। स्थानीय नेताओं के बीच भी माना जा रहा है कि नए चेहरे आने से जमीनी कार्यकर्ताओं को ऊपर आने का रास्ता मिलेगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संगठन में बदलाव का मकसद सिर्फ पद भरना नहीं, बल्कि आने वाले महीनों में प्रचार, बूथ प्रबंधन और केंद्र-राज्य की योजनाओं को गांव-गली तक पहुंचाने की तैयारी करना है। भाजपा के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, देवरिया और चंदौली जैसे जिले रणनीतिक रूप से अहम हैं, क्योंकि यहां संगठन की पकड़ मजबूत रखने का सीधा असर चुनावी नतीजों पर पड़ता है। अब सबकी निगाह इस बात पर है कि नई सूची में किन कार्यकर्ताओं को जगह मिलती है और कितने पुराने चेहरों को बरकरार रखा जाता है।
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