महाराष्ट्र में अब कैब चलानी है तो मराठी भाषा जरूरी! नए नियम से मचा बवाल

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महाराष्ट्र में अब कैब और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य करने के नियम को सख्ती से लागू करने की तैयारी है।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कमर्शियल पैसेंजर व्हीकल चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को अनिवार्य कर दिया है। नए नियमों के तहत ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों को यात्रियों के साथ सामान्य बातचीत करने लायक मराठी का व्यावहारिक ज्ञान होना जरूरी होगा। यह नियम सिर्फ पारंपरिक टैक्सी और ऑटो तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐप के जरिए चलने वाली कैब सेवाओं के ड्राइवर भी इसके दायरे में आएंगे। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन में काम करने वाले ड्राइवरों को राज्य की आधिकारिक भाषा में यात्रियों से संवाद करने में सक्षम होना चाहिए।

Ola-Uber ड्राइवर भी नियम के दायरे में

नए प्रावधानों का असर ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं पर भी पड़ेगा। यानी महाराष्ट्र में Ola, Uber और दूसरी एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए यात्रियों को सेवा देने वाले ड्राइवरों को भी मराठी का आवश्यक ज्ञान रखना होगा। सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ ऐप के जरिए काम करने की वजह से किसी ड्राइवर को इस नियम से छूट नहीं मिलेगी। इससे बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के सामने भाषा सीखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। हालांकि सरकार की तरफ से यह भी कहा गया है कि उद्देश्य ड्राइवरों को परेशान करना नहीं, बल्कि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच स्थानीय भाषा में बुनियादी संवाद सुनिश्चित करना है।

नियम तोड़ा तो हो सकती है कड़ी कार्रवाई

सरकार ने नियमों के पालन को लेकर कार्रवाई का प्रावधान भी रखा है। रिपोर्टों के मुताबिक नियमों का पालन नहीं करने वाले ड्राइवरों के खिलाफ उनकी ड्राइविंग अथॉराइजेशन को कुछ समय के लिए निलंबित किया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन होने पर लाइसेंस या बैज रद्द किए जाने तक की कार्रवाई संभव है। यानी अब सिर्फ वाहन का परमिट या ड्राइविंग लाइसेंस होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निर्धारित भाषा संबंधी शर्तों का पालन करना भी जरूरी होगा। इससे परिवहन विभाग और RTO की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि इन्हीं के जरिए नियमों के अनुपालन की निगरानी की जाएगी।

पहले भी हुआ था विरोध और विवाद

मराठी भाषा को अनिवार्य करने का मुद्दा महाराष्ट्र में पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। इससे पहले सरकार ने ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी ज्ञान लागू करने की घोषणा की थी, जिसके बाद कुछ ड्राइवर संगठनों ने भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए समय देने और जागरूकता सामग्री उपलब्ध कराने की बात कही थी। इस वजह से नियम के लागू होने और कार्रवाई की समयसीमा को लेकर कई चरणों में बदलाव और चर्चाएं हुईं। अब नए संशोधित नियमों के साथ सरकार इसे अधिक स्पष्ट और सख्ती से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भाषा के साथ रोजी-रोटी का भी सवाल

सरकार के इस फैसले से जहां मराठी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों के लिए यह रोजी-रोटी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। सरकार का कहना है कि ड्राइवरों से किसी कठिन स्तर की भाषा परीक्षा की मांग नहीं की जा रही, बल्कि यात्रियों से सामान्य बातचीत करने लायक व्यावहारिक मराठी अपेक्षित है। दूसरी तरफ ड्राइवर संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने पहले भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की थी। अब देखना होगा कि नियम लागू होने के बाद RTO स्तर पर इसकी जांच किस तरह होती है और गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों को कितनी राहत या अतिरिक्त समय मिलता है।

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