यूपी में महिलाओं को 50 हजार रुपये की मदद की तैयारी, चुनाव से पहले 20 हजार की पहली किस्त पर चर्चा
- Babli Ansari
- 13 Aug, 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिलाओं को लेकर नई योजना की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के स्तर पर एक ऐसी आर्थिक सहायता योजना पर मंथन चल रहा है, जिसमें पात्र महिलाओं को कुल 50 हजार रुपये तक की मदद दी जा सकती है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चुनाव से पहले 20 हजार रुपये की पहली किस्त सीधे खाते में भेजी जा सकती है। बाकी राशि बाद के चरणों में दी जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि अभी तक सरकार ने इस योजना का औपचारिक ऐलान नहीं किया है, इसलिए अंतिम रूपरेखा पर तस्वीर साफ नहीं है।
योजना की चर्चा, रकम और किस्तों का ढांचा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रस्तावित योजना का मकसद महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। चर्चा यह भी है कि सहायता तीन या चार किस्तों में दी जा सकती है, ताकि लाभार्थी रकम का उपयोग छोटे काम शुरू करने, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने या घरेलू उद्यम खड़ा करने में कर सकें। कुछ स्रोतों में कहा गया है कि पहली किश्त 20 हजार रुपये की होगी और शेष 30 हजार रुपये बाद में 10-10 हजार की किस्तों में दिए जा सकते हैं। कई रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि योजना का फोकस आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं पर रहेगा, लेकिन पात्रता का अंतिम मानक अभी तय नहीं हुआ है।
टीवी9 यूपी, दैनिक भास्कर, प्रभात खबर, सत्य हिंदी, हिन्दुस्तान और इंडिया टीवी जैसी रिपोर्टों में एक समान बात सामने आई है कि यह फिलहाल सरकारी स्तर पर विचाराधीन प्रस्ताव है। अलग-अलग रिपोर्टों में 50 लाख महिलाओं तक लाभ पहुंचाने की संभावना भी जताई गई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ माध्यमों ने इसे बिहार मॉडल से जोड़कर देखा है, जहां महिलाओं को चुनाव से पहले नकद सहायता दी गई थी। उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह के फॉर्मूले पर विचार होने की बात कही जा रही है, मगर सरकार की तरफ से अभी कोई अधिसूचना या दिशा-निर्देश जारी नहीं हुए हैं।
चुनावी सियासत और विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस चर्चा ने विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी तापमान और बढ़ा दिया है। विपक्ष ने इसे सीधे-सीधे चुनावी दांव बताना शुरू कर दिया है, जबकि सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़कर देख रहा है। कुछ रिपोर्टों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और डिंपल यादव की ओर से इस प्रस्ताव पर तंज का भी जिक्र है, जिससे साफ है कि मामला अब सिर्फ योजना का नहीं, सियासी मुकाबले का भी बन गया है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि अगर सरकार ने यह कदम आगे बढ़ाया तो इसका सीधा असर महिला वोट बैंक पर पड़ सकता है।
अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि योजना कब लागू होगी, कौन पात्र होगा और किस आधार पर लाभार्थियों का चयन होगा। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इसकी घोषणा चुनावी रणनीति के लिहाज से बेहद अहम मानी जाएगी। सूत्रों के अनुसार सरकार इसे सीधे नकद सहायता के साथ स्वरोजगार से जोड़ने की कोशिश कर सकती है, ताकि योजना को सिर्फ राहत नहीं बल्कि आजीविका से जोड़कर पेश किया जा सके। फिलहाल सभी की निगाहें लखनऊ पर टिकी हैं, क्योंकि आधिकारिक घोषणा आने के बाद ही साफ होगा कि यह प्रस्ताव जमीन पर कब उतरता है और किस पैमाने पर लागू किया जाता है।
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