‘वंदे मातरम्’ पर BJP का बड़ा वार! कांग्रेस के खिलाफ पास हुआ प्रस्ताव

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‘वंदे मातरम्’ को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और तेज हो गया है। कांग्रेस के कार्यक्रमों में गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने के फैसले के विरोध में बीजेपी ने प्रस्ताव पारित किया है। बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कांग्रेस के फैसले की आलोचना की और देशभर में विरोध का ऐलान किया है।

नई दिल्ली। वंदे मातरम् को लेकर सियासी लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी के उस फैसले के बाद, जिसमें पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो छंद गाने की बात दोहराई गई, भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को पार्टी ने एक प्रस्ताव पारित कर कांग्रेस के रुख को देश के सम्मान और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत के खिलाफ बताया। प्रस्ताव में कहा गया कि वंदे मातरम् की पूरी रचना, उसकी ऐतिहासिक भूमिका और राष्ट्रीय भाव को किसी राजनीतिक सुविधा के तहत सीमित नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे पर भाजपा ने कांग्रेस पर एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया और साफ संकेत दिया कि यह लड़ाई अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगी।


बीजेपी ने कहा- राष्ट्रीय गीत की पूरी गरिमा से समझौता नहीं

पार्टी सूत्रों के मुताबिक प्रस्ताव में वंदे मातरम् को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा करार दिया गया और कहा गया कि इसके साथ किसी तरह की कटौती स्वीकार नहीं की जा सकती। भाजपा ने कांग्रेस के फैसले को ऐतिहासिक संदर्भ से काटकर लिया गया कदम बताया। पार्टी ने यह भी कहा कि वंदे मातरम् के छहों छंद भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा हैं, इसलिए इसे आधा गाना प्रतीकात्मक राजनीति से ज्यादा कुछ नहीं है। बैठक में मौजूद नेताओं ने इस मुद्दे को देशभर में उठाने की बात कही। प्रस्ताव के जरिए भाजपा ने साफ संदेश दिया कि वह इस विवाद को सिर्फ संसद या मंच तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे जनसंपर्क अभियान का मुद्दा बनाएगी।


कांग्रेस के 1937 वाले फैसले पर टिकी बहस

विवाद की जड़ 1937 में कांग्रेस के उस पुराने फैसले में है, जिसके हवाले से पार्टी अब भी कह रही है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के सिर्फ शुरुआती दो छंद ही गाए जाएंगे। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उस समय की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति, जिनमें महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल जैसे नाम शामिल थे, इसी रुख के साथ थी। पार्टी का तर्क है कि यही ऐतिहासिक परंपरा आज भी मान्य है। दूसरी तरफ भाजपा इस दलील को राजनीतिक बचाव बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि राष्ट्रीय गीत को खंडित रूप में प्रस्तुत करना उसकी मूल भावना को कमजोर करता है और इससे गलत संदेश जाता है।


अमित शाह के बयान के बाद और गरमाया माहौल

इस पूरे विवाद को और धार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान से मिली, जिन्होंने कांग्रेस के फैसले को देशविरोधी और संविधान की भावना के खिलाफ बताया। भाजपा नेताओं ने भी इसे लेकर कांग्रेस पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक पार्टी अब कार्यकर्ताओं को इस मुद्दे पर बूथ स्तर तक सक्रिय करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में वंदे मातरम् को लेकर भाजपा का अभियान और तेज होगा, जबकि कांग्रेस अपने पुराने फैसले को ऐतिहासिक और वैचारिक आधार पर सही ठहराने की कोशिश में जुटी रहेगी। फिलहाल, यह विवाद एक सांस्कृतिक बहस से निकलकर सीधे राजनीतिक टकराव में बदल चुका है।

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