स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, बुलंदशहर से हुई हिरासत
- Babli Ansari
- 05 Sep, 2026
नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए कथित हमले के मामले में घिरे स्वंतंत्र भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया है और उसे पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब मामले को लेकर राजधानी में दबाव लगातार बढ़ रहा था और संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन भी हुए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी की तलाश कई दिनों से चल रही थी, लेकिन वह पहले टीम को चकमा देकर निकल गया था। अब उसे पकड़कर आगे की पूछताछ शुरू कर दी गई है। इस पूरे मामले ने न सिर्फ राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ाई है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
बुलंदशहर से दबोचा गया, दिल्ली लाकर पूछताछ
मामले से जुड़े पुलिस और जांच सूत्रों का कहना है कि स्वंतंत्र भारद्वाज पर आरोप है कि उसने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट की थी। इसी केस के बाद उसका एक वीडियो और इंटरव्यू वायरल हुआ, जिसमें वह कथित तौर पर हमले की बात स्वीकार करते हुए दिखा। यही वीडियो इस विवाद की सबसे बड़ी वजह बना। दिल्ली पुलिस ने पहले भी उसे पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह हाथ नहीं आया। बताया जा रहा है कि जब पुलिस टीम उत्तर प्रदेश में उसे पकड़ने पहुंची, तब भी वह बच निकला था। बाद में खुफिया और स्थानीय इनपुट के आधार पर उसे बुलंदशहर में ट्रेस किया गया और वहीं से हिरासत में लिया गया।
वायरल वीडियो के बाद बढ़ा दबाव
इस केस में सबसे अहम मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर वायरल बयान ने मामला और गरमा दिया। सूत्रों के मुताबिक, उस वीडियो में आरोपी ने खुद को बेहद ताकतवर बताते हुए ऐसी बातें कही थीं, जिनसे लोगों में गुस्सा भड़क गया। पीड़ित पक्ष और प्रदर्शनकारियों ने इसे सीधा सबूत बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। दिल्ली पुलिस पर भी सवाल उठे कि आखिर इतनी चर्चा के बाद गिरफ्तारी में देरी क्यों हुई। इसी बीच संसद मार्ग थाने के बाहर विरोध तेज हुआ और पुलिस को सार्वजनिक तौर पर जवाब देना पड़ा। जांच एजेंसियों ने अब मेडिकल रिपोर्ट, वायरल क्लिप और मौके के बयानों को साथ रखकर केस को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
आगे की जांच में क्या बदल सकता है
अब पूरा मामला पुलिस जांच के अगले चरण में पहुंच गया है, जहां हिरासत में लेकर आरोपी से घटना की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह देखा जा रहा है कि घटना के वक्त मौके पर कौन-कौन मौजूद था, वायरल बयान कब और कैसे रिकॉर्ड हुआ और क्या इसके पीछे कोई सुनियोजित भड़काऊ अभियान भी था। पीड़ित पक्ष चाहता है कि मामले में सख्त धाराएं लगें और जांच किसी दबाव में न आए। उधर, कानून-व्यवस्था से जुड़े अधिकारी मानते हैं कि इस तरह के मामलों में एक वीडियो पूरे घटनाक्रम का रुख बदल देता है। फिलहाल दिल्ली पुलिस की नजर अब बयान, सबूत और मोबाइल डिजिटल ट्रेल पर है, क्योंकि यही आगे की चार्जशीट की दिशा तय करेगा।
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