सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन में CM रेखा गुप्ता, पूरे दिल्ली के PG की होगी जांच
- Babli Ansari
- 08 Sep, 2026
नई दिल्ली। सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सीधे एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचीं और वहां भर्ती घायलों, उनके परिजनों तथा डॉक्टरों से मुलाकात की। जानकारी के मुताबिक उन्होंने इलाज में किसी तरह की कमी न रहने देने का भरोसा दिया और अस्पताल प्रशासन से हर मरीज की स्थिति की विस्तार से रिपोर्ट ली। इस हादसे में सात लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ घायलों का इलाज अब भी जारी है। मुख्यमंत्री के दौरे के साथ ही दिल्ली सरकार ने साफ कर दिया है कि अब शहर के पीजी, होस्टल और ऐसे तमाम रिहायशी ठिकानों की सुरक्षा जांच को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
एम्स में घायलों से मुलाकात, परिवारों को भरोसा
एम्स ट्रॉमा सेंटर में रेखा गुप्ता ने न सिर्फ घायलों का हाल पूछा, बल्कि उनके साथ आए परिवारों की चिंता भी सुनी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों और स्टाफ को निर्देश दिया कि इलाज में कोई औपचारिकता नहीं, सीधे जरूरत के मुताबिक देखभाल हो। पीड़ित परिवारों ने मौके पर राहत पैकेज, इलाज का खर्च और आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए, जिन पर सरकार की ओर से सहयोग का आश्वासन दिया गया। यह भी बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने हादसे के पीछे लापरवाही या निर्माण नियमों के उल्लंघन की आशंका पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासनिक अमले को साफ संदेश दिया गया है कि जिम्मेदारी जहां बनती है, वहां कार्रवाई टलनी नहीं चाहिए।
पीजी और छात्र आवासों पर सख्ती, जांच का दायरा बढ़ा
हादसे ने दिल्ली के उन इलाकों पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां बड़ी संख्या में छात्र और कामकाजी लोग पीजी में रहते हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकार ने एमसीडी और संबंधित एजेंसियों को आदेश दिया है कि शहर के सभी पीजी, हॉस्टल और किराये के बड़े आवासों की संरचनात्मक जांच की जाए। फायर एनओसी, बिल्डिंग परमिशन, स्थिरता प्रमाणपत्र और सुरक्षा मानकों की बारीकी से पड़ताल होगी। यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि साउथ दिल्ली, मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, साकेत और सत्यम निकेतन जैसे इलाकों में अवैध या कमजोर ढांचे लंबे समय से चिंता का कारण बने हुए हैं। हादसे के बाद आसपास की खतरनाक इमारतों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
हादसे की जिम्मेदारी और आगे की कार्रवाई
दिल्ली में इस घटना को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव दोनों बढ़ गए हैं। पुलिस, नगर निगम और अन्य एजेंसियां अब हादसे की वजहों की तह तक जाने की कोशिश में लगी हैं, जबकि प्रभावित परिवार न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट स्तर पर भी सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सख्त रुख सामने आया है, जिससे जांच की दिशा और तेज हुई है। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ घायलों का बेहतर इलाज और मृतकों के परिवारों को सहायता, दूसरी तरफ राजधानी के हजारों पीजी और छात्रावासों में मौजूद जोखिम को तुरंत कम करना। आने वाले दिनों में निरीक्षण रिपोर्ट, प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी कार्रवाई इस मामले की असली कसौटी बनेंगे।
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