गोरखपुर में सुमेर सागर से लाहीबाग तक नाला निर्माण को 98 करोड़ मंजूर, जलभराव से मिलेगी राहत
- Babli Ansari
- 04 Nov, 2026
गोरखपुर। शहर के सुमेर सागर से लाहीबाग तक जलनिकासी व्यवस्था सुधारने वाली बड़ी परियोजना को मंजूरी मिल गई है। करीब 98 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस नाले से बरसात में जलभराव की समस्या झेल रहे हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से इस मार्ग और आसपास के मोहल्लों में पानी निकासी की क्षमता कमजोर बनी हुई थी। तेज बारिश होते ही सड़कें और गलियां पानी में डूब जाती थीं, जिससे यातायात के साथ जनजीवन भी प्रभावित होता था। जानकारी के मुताबिक प्रस्तावित काम में नाले का निर्माण, पुराने जलनिकासी मार्गों का सुधार और पानी को आगे ले जाने वाली व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है। परियोजना को शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सुमेर सागर से लाहीबाग तक बनेगा प्रमुख जलनिकासी मार्ग
मंजूरी के बाद अब संबंधित विभाग परियोजना की तकनीकी प्रक्रिया और कार्ययोजना को अंतिम रूप देगा। सुमेर सागर क्षेत्र से निकलने वाला पानी लाहीबाग की ओर व्यवस्थित ढंग से पहुंचाने के लिए नया नाला तैयार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, निर्माण के दौरान नाले की चौड़ाई, गहराई और पानी के प्रवाह की क्षमता का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि सामान्य बारिश के साथ तेज वर्षा में भी निकासी बाधित न हो। इस मार्ग से जुड़े घनी आबादी वाले हिस्सों में जलभराव की शिकायत लंबे समय से सामने आती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी घंटों जमा रहता है और दुकानदारों तथा राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ती है। परियोजना पूरी होने पर इन इलाकों की सड़कों, बाजारों और आवासीय बस्तियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है।
शहरी जलभराव रोकने पर नगर निगम का जोर
गोरखपुर में बरसात के मौसम में जलभराव कई वर्षों से बड़ी नागरिक समस्या बना हुआ है। निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने के साथ नालों की सफाई और उनकी सीमित क्षमता भी परेशानी बढ़ाती है। इसी वजह से शहर में बड़े जलनिकासी मार्गों के निर्माण और पंपिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। हाल में भरवलिया और बड़गो क्षेत्र में भी जलभराव कम करने के लिए दो संपवेल बनाए जाने का काम शुरू हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक इन संपवेलों में पंप लगाए जाएंगे, जिनके जरिए जमा पानी को तेजी से बाहर निकाला जा सकेगा। सुमेर सागर-लाहीबाग परियोजना को इसी व्यापक योजना से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि निर्माण के दौरान यातायात और स्थानीय आवागमन प्रभावित न हो, इसके लिए चरणबद्ध काम जरूरी होगा।
निर्माण शुरू होने का इंतजार, निगरानी रहेगी चुनौती
परियोजना की स्वीकृति से स्थानीय निवासियों में उम्मीद जगी है, लेकिन असली राहत काम पूरा होने के बाद ही मिलेगी। लोगों का कहना है कि नाला बनने के साथ उसकी नियमित सफाई और अतिक्रमण से सुरक्षा भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। कई शहरों में निर्माण के बाद रखरखाव के अभाव में जलनिकासी की योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं। ऐसे में नगर निगम और कार्यदायी संस्था को गुणवत्ता, समयसीमा और पानी के अंतिम निकास बिंदु पर लगातार निगरानी रखनी होगी। बताया जा रहा है कि स्वीकृति के बाद निविदा और अन्य औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा। बरसात से पहले काम के संवेदनशील हिस्सों को प्राथमिकता देने की मांग भी उठ रही है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस बात पर है कि 98 करोड़ की यह परियोजना जमीन पर कितनी तेजी से उतरती है।
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