Navratri Special: द्वापर युग से जल रही मां के इस मंदिर में ज्योति, पांडवों ने की थी तपस्या, डकैती से है ये खास नाता !

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उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में माता का मंदिर आस्था और इतिहास का प्रतीक है। मान्यता है कि द्वापर युग में महर्षि वेदव्यास ने इस मंदिर की स्थापना की थी।

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में माता का मंदिर आस्था और इतिहास का प्रतीक है। मान्यता है कि द्वापर युग में महर्षि वेदव्यास ने इस मंदिर की स्थापना की थी। कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर स्वयं देवी मां प्रकट हुई थीं।

यह मंदिर कभी बीहड़ में डकैतों की आस्था का केंद्र हुआ करता था। फूलन देवी, मलखान सिंह, पहलवान सिंह, निर्भय गुर्जर जैसे कुख्यात डकैत नवरात्र में यहां माथा टेकने आते थे। डकैतों की मन्नतों के चलते इस मंदिर को 'डकैतों वाले मंदिर' के नाम से भी जाना जाता था।

बीहड़ में गूंजती थीं गोलियां, अब बजते हैं शंखबीते दशकों तक यह इलाका डकैतों के आतंक से प्रभावित था, जिस कारण श्रद्धालु मंदिर में कम आते थे। डकैतों के दौर में नवरात्र के दौरान यहां गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, लेकिन अब यहां शंख-घंटियों की आवाज गूंजती है। बीहड़ में डकैतों के खात्मे के बाद श्रद्धालु निर्भय होकर दर्शन करने आने लगे हैं।

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए जाते हैं जवारेमंदिर में मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा पूरी होती है। मन्नत पूरी होने पर भक्त जवारे लेकर पैदल यात्रा करते हुए मंदिर में चढ़ाने आते हैं। नवरात्र के दौरान यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु उमड़ते हैं।

सुरक्षा और श्रद्धा का संगमआज यह मंदिर केवल आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक बन चुका है। बीहड़ में स्थापित यह मंदिर अब पूरी तरह सुरक्षित है और श्रद्धालुओं की भीड़ दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। आसपास के जिलों इटावा, औरैया, कानपुर देहात, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, झांसी, हमीरपुर, ललितपुर और दतिया से भक्त बड़ी संख्या में दर्शन करने आते हैं।

जालौन वाली माता का यह मंदिर सदियों से जल रही अखंड ज्योति का साक्षी है। नवरात्र के समय यहां भक्ति का माहौल देखते ही बनता है।

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