योगी सरकार ने यूपीईडा एक्सप्रेसवे विभाग अपने पास लिया, नंदी से प्रभार वापस
- Shiv Kumar
- 08 Jun, 2026
लखनऊ। योगी सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए यूपीईडा और एक्सप्रेसवे से जुड़े विभागीय कामकाज को मुख्यमंत्री कार्यालय के सीधे नियंत्रण में ले लिया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के पास थी, लेकिन अब प्रभार वापस लेकर उसे नए सिरे से मुख्यमंत्री स्तर पर केंद्रित कर दिया गया है। सरकारी गलियारों में इसे बेहद अहम बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि यूपी में एक्सप्रेसवे नेटवर्क सरकार की सबसे बड़ी विकास परियोजनाओं में गिना जाता है। सूत्रों के अनुसार इस कदम के पीछे परियोजनाओं की रफ्तार, समन्वय और निगरानी को और मजबूत करने की मंशा है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के हाथ में क्यों आई कमान
जानकारी के मुताबिक यूपीईडा यानी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण का काम राज्य में सड़क ढांचे, औद्योगिक गलियारों और बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है। सरकार ने जिस तरह से इसे सीधे अपने नियंत्रण में लिया है, उससे साफ है कि आने वाले वक्त में हाईवे और एक्सप्रेसवे योजनाओं की निगरानी अब और सख्त होगी। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि जिन परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण, टेंडर, निर्माण और समयबद्धता जैसे मुद्दे अहम हैं, वहां मुख्यमंत्री कार्यालय की सीधी भूमिका फैसलों की रफ्तार बढ़ा सकती है। पिछले कुछ समय से कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर सरकार लगातार समीक्षा कर रही थी और यह कदम उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
नंदी से प्रभार वापस लेने के बाद अब विभागीय फाइलों और प्रस्तावों पर अंतिम स्तर की पकड़ और मजबूत हो जाएगी। सूत्र बताते हैं कि यूपी में एक्सप्रेसवे राजनीति और विकास, दोनों का बड़ा चेहरा बन चुके हैं, इसलिए इस विभाग को हल्के में नहीं लिया जाता। यही वजह है कि सरकार हर छोटे-बड़े फैसले पर सीधे नजर रखना चाहती है। खास बात यह है कि यूपीईडा केवल सड़क निर्माण एजेंसी नहीं, बल्कि औद्योगिक निवेश और क्षेत्रीय विकास की भी बड़ी कड़ी है। ऐसे में विभाग का ट्रांसफर एक साधारण प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि नीति और प्राथमिकता के स्तर पर बड़ा संकेत माना जा रहा है।
एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर पड़ेगा क्या असर
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क पहले ही प्रदेश की राजनीतिक पहचान बन चुका है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से लेकर बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं ने राज्य की कनेक्टिविटी को नया आकार दिया है। अब जब यूपीईडा का नियंत्रण सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के पास गया है, तो माना जा रहा है कि परियोजनाओं की निगरानी, फंडिंग और समन्वय में और कसावट आएगी। अधिकारियों के लिए यह संकेत भी है कि अब देरी, फाइलें रोकने या प्रक्रियागत ढिलाई की गुंजाइश कम होगी।
फिलहाल इस बदलाव पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि योगी सरकार बड़े बुनियादी ढांचे के कामों में किसी तरह की ढिलाई नहीं चाहती। आने वाले दिनों में यूपीईडा के जरिए चल रही योजनाओं पर नई समीक्षा और तेज मॉनिटरिंग देखने को मिल सकती है। इससे न सिर्फ निर्माण एजेंसियों पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि ज़मीनी स्तर पर परियोजनाओं की टाइमलाइन भी कड़ी निगरानी में आ जाएगी। राज्य के विकास एजेंडे में एक्सप्रेसवे जिन्दा मुद्दा है और अब उसकी कमान और भी ऊपर चली गई है।
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