राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, SIT की शुरुआती रिपोर्ट में 150 संदिग्धों के नाम, FIR की तैयारी तेज, SIT आज योगी को सौंपेगी रिपोर्ट

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की शुरुआती रिपोर्ट में 150 संदिग्धों के नाम सामने आए हैं। FIR की तैयारी चल रही है। जांच में दान राशि, CCTV फुटेज और ट्रस्ट से जुड़े कई मामलों पर गंभीर सवाल उठे हैं, जिससे मामला और गहराता जा रहा है।

अयोध्या में स्थित राम मंदिर अयोध्या से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच में बड़ा मोड़ सामने आ रहा है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की ओर से तैयार की गई शुरुआती रिपोर्ट आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। रविवार शाम टीम की मुलाकात का प्रयास हुआ था, लेकिन व्यस्तता के कारण बैठक नहीं हो सकी। जांच में सामने आए शुरुआती निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है, जहां कई स्तरों पर वित्तीय अनियमितताओं और डेटा हेरफेर के आरोपों की जांच की जा रही है। 


जांच में 150 संदिग्ध, कई पर कार्रवाई की तैयारी

SIT की जांच में अब तक करीब 150 संदिग्धों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें से लगभग 25 लोगों पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। जांच टीम ने पूरा डेटा 7 पेन ड्राइव में सुरक्षित किया है। जिन लोगों से पूछताछ हो चुकी है, उन्हें अगले आदेश तक शहर छोड़ने से मना किया गया है। इनमें ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगले चरण में कई और लोगों को भी पूछताछ के दायरे में लाया जा सकता है ताकि पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।


FIR की तैयारी, सीसीटीवी डिलीट और दान में गड़बड़ी के आरोप

जांच एजेंसी आने वाले दिनों में FIR दर्ज करने की तैयारी में है। करीब 80 लोगों को नामजद किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिनमें ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारी और करीबी लोग शामिल हो सकते हैं। आरोप है कि दान राशि के रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया और कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज भी डिलीट कराई गई। इसके अलावा सीता रसोई ट्रस्ट और महाकुंभ के दौरान मिले दान को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आ रहा है कि दान राशि का सही हिसाब-किताब रिकॉर्ड में नहीं दिखाया गया।


सुरक्षा, ट्रस्ट प्रबंधन और CEO नियुक्ति पर मंथन

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन अब ट्रस्ट की व्यवस्था में बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, Ram Mandir Trust के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता लाने के लिए काशी विश्वनाथ मॉडल की तरह CEO नियुक्त करने पर चर्चा चल रही है। इसके अलावा दान, लेखा-जोखा और प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या दान से जुड़े अन्य ट्रस्टों के जरिए भी किसी तरह की अनियमितता की गई है।


राजनीतिक बयानबाजी और बढ़ता विवाद

इस पूरे मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्ष की ओर से पहले ही चोरी और अनियमितता के आरोप लगाए गए थे, जबकि ट्रस्ट की ओर से इन दावों को खारिज किया गया था। अब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला और गरमाता नजर आ रहा है। आगे SIT की FIR और विस्तृत रिपोर्ट के बाद इस केस में बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।

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