अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT की रिपोर्ट सरकार को सौंपी, 150 पेज की जांच में कई अहम सिफारिशें

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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने 150 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। रिपोर्ट में FIR, ट्रस्ट पुनर्गठन और CEO नियुक्ति समेत कई अहम सिफारिशें की गई हैं। अब अंतिम निर्णय सरकार को लेना है।

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी और अनियमितताओं के मामले में गठित SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। मंगलवार सुबह SIT की टीम अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के कार्यालय पहुंची और उन्हें करीब 150 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में 150 से अधिक लोगों के बयान और पूछताछ का विवरण शामिल बताया जा रहा है। मामले को लेकर अब सरकार के स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।


SIT की रिपोर्ट में बड़े खुलासे और सिफारिशें

सूत्रों के मुताबिक SIT ने अपनी रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। इनमें इस मामले में FIR दर्ज करने, ट्रस्ट के पुनर्गठन और मंदिर प्रशासन के लिए एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को CEO नियुक्त करने की बात शामिल है। साथ ही पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे का विस्तृत ऑडिट कराने की भी सिफारिश की गई है। टीम ने यह भी सुझाव दिया है कि चढ़ावे की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई भर्ती और प्रशासनिक सुधार किए जाएं। रिपोर्ट को फिलहाल प्रारंभिक बताया गया है और आगे गहन जांच के लिए अतिरिक्त समय की मांग भी की गई है।


जांच के दायरे में कई लोग, करोड़ों की रिकवरी

इस मामले में अब तक पांच आरोपियों की भूमिका सामने आई है, जिनकी निशानदेही पर करीब 2 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। वहीं कुछ मामलों में सोना मिलने की भी जानकारी सामने आई है। शुरुआती अनुमान के अनुसार, कथित अनियमितता और चोरी का आंकड़ा 200 करोड़ रुपये से अधिक तक पहुंच सकता है। SIT ने छह दिनों तक अयोध्या में रहकर जांच की और कई दस्तावेजों व साक्ष्यों को खंगाला। रिपोर्ट में सभी पहलुओं को शामिल किया गया है ताकि आगे की जांच को मजबूत आधार मिल सके।


मंदिर प्रशासन में बड़े बदलाव की चर्चा

सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक CEO नियुक्त करने पर विचार कर रही है। इसका उद्देश्य वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है। CEO की जिम्मेदारी दान, लेखा-जोखा और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी की होगी। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा। साथ ही ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर भी मंथन जारी है।


पुरानी शिलाओं और संपत्ति को लेकर भी उठे सवाल

इस पूरे मामले में एक और दावा भी सामने आया है जिसमें कहा गया है कि सोने-चांदी और अन्य धातुओं से बनी लगभग 1250 श्रीराम शिलाएं गायब हैं। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि ये शिलाएं पहले कारसेवकपुरम में रखी गई थीं। मामले को लेकर अब जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही हैं।

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