बिहार के स्कूलों में जींस-टीशर्ट पर बैन! शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड लागू

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बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड, जींस और टी-शर्ट पहनने पर रोक

बिहार के सरकारी स्कूलों में अब शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मी जींस-टीशर्ट पहनकर नहीं पहुंच सकेंगे। शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि स्कूल और कार्यालय अवधि में सभी कर्मियों को केवल औपचारिक परिधान में ही उपस्थित होना होगा। विभाग का तर्क है कि इससे विद्यालयों की गरिमा, अनुशासन और शैक्षणिक माहौल को मजबूती मिलेगी। सपौल समेत कई जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस बाबत पत्र भेजकर आदेश के सख्त पालन का निर्देश दिया गया है।

शिक्षा विभाग ने क्यों कसा शिकंजा

निदेशक स्तर से जारी निर्देश में कहा गया है कि शिक्षकों का पहनावा सिर्फ निजी पसंद का मामला नहीं है, बल्कि वह स्कूल की छवि और बच्चों पर पड़ने वाले असर से भी जुड़ा है। आदेश में फॉर्मल ड्रेस को अनिवार्य करते हुए जींस, टी-शर्ट और अन्य अनौपचारिक कपड़ों से बचने को कहा गया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कई स्कूलों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ शिक्षक निर्धारित गरिमा के अनुरूप वेशभूषा में नहीं आते। इसी के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे राज्य में एक समान मानक लागू करने का फैसला किया है।

जानकारी के मुताबिक, पटना स्थित निदेशक (प्रशासन) की ओर से 20 जुलाई 2026 को सभी डीईओ को पत्र जारी किया गया। इसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिलों को यह भी कहा गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सभी सरकारी विद्यालयों तक आदेश पहुंचाएं और नियमित निगरानी करें। पश्चिम चंपारण से लेकर पूर्णिया और कटिहार तक, अलग-अलग जिलों में इसी तरह के निर्देश पहले भी जारी हो चुके हैं, लेकिन अब विभाग ने इसे राज्यव्यापी सख्ती के रूप में लागू करने का संकेत दिया है।

रील और अमर्यादित गतिविधियों पर भी नजर

इस आदेश का दायरा सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है। पश्चिम चंपारण के मामले में जारी निर्देशों में स्कूल परिसर के भीतर सोशल मीडिया रील, अभद्र व्यवहार और अन्य अमर्यादित गतिविधियों पर भी रोक लगाई गई है। शिक्षा विभाग का रुख है कि स्कूल परिसर शिक्षा का स्थान है, इसलिए वहां हर गतिविधि शालीन और अनुशासित होनी चाहिए। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि सिर्फ शिक्षा कैलेंडर के तहत होने वाले कार्यक्रम ही अनुमेय होंगे और वे भी गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित किए जाएं।

मामले ने शिक्षकों के बीच चर्चा तेज कर दी है। कुछ शिक्षक इसे व्यवस्था सुधारने की कोशिश मान रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि ड्रेस कोड लागू करने के साथ-साथ बुनियादी शैक्षिक सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए। फिलहाल विभाग ने साफ संकेत दे दिया है कि नियमों में ढिलाई नहीं चलेगी। जिला शिक्षा पदाधिकारियों से कहा गया है कि वे अनुपालन की रिपोर्ट भेजें और जहां आदेश नहीं माना जाए, वहां कार्रवाई शुरू की जाए।

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