Kashi में 45 साल बाद बदलेगी परंपरा, इस बार महाशिवरात्रि पर नहीं निकलेगी शिव जी की बारात

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वाराणसी। महादेव की नगरी काशी में 45 वर्षों से चली आ रही परंपरा इस बार बदलने जा रही है। हर साल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की भव्य बारात निकाली जाती थी

वाराणसी। महादेव की नगरी काशी में 45 वर्षों से चली आ रही परंपरा इस बार बदलने जा रही है। हर साल महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भगवान शिव की भव्य बारात निकाली जाती थी, लेकिन इस वर्ष यह परंपरा टूट रही है। आयोजकों ने महाकुंभ से आने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए शिव बारात की तिथि को एक दिन आगे बढ़ा दिया है। अब यह ऐतिहासिक बारात महाशिवरात्रि के दिन न निकलकर 27 फरवरी को पूरी भव्यता के साथ निकाली जाएगी।

महाशिवरात्रि पर सुरक्षा कारणों से लिया गया फैसला

शिव बारात आयोजन समिति के संस्थापक और संयोजक दिलीप सिंह ने बताया कि इस वर्ष प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी पहुंच रहे हैं। इससे शहर में पहले से ही अत्यधिक भीड़ होने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षा और सुगम यातायात को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और आयोजन समिति ने शिव बारात को 27 फरवरी को निकालने का निर्णय लिया है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी। महाशिवरात्रि के दिन विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ेगा, जिससे सड़कों पर पहले ही काफी भीड़ रहेगी। यदि इसी दिन शिव बारात भी निकाली जाती, तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती थी। इसीलिए परंपरा में यह परिवर्तन किया गया है।

रात 8 बजे निकलेगी बारात, लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान

27 फरवरी की रात 8 बजे महामृत्युंजय मंदिर से यह ऐतिहासिक बारात निकलेगी, जो काशी के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी। शिव बारात के दौरान भगवान शिव की बारात में भूत, पिशाच, गण, ऋषि-मुनि, देवी-देवता, यक्ष और गंधर्व शामिल होंगे। ढोल-नगाड़ों की गूंज और स्वस्तिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाएगा।

इस बारात में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है। आयोजन समिति ने लोगों से अपील की है कि महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे इस बारात को घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से देखें, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।

धनसंग्रह की परंपरा से अलग है यह आयोजन

दिलीप सिंह ने बताया कि शिव बारात के आयोजन के लिए किसी प्रकार का चंदा या धन संग्रह नहीं किया जाता। आयोजन समिति के सदस्य ही इस पूरी बारात का प्रबंध करते हैं। वे इसे श्रद्धा और सेवा भाव से आयोजित करते हैं।

काशी में शिव बारात का महत्व

काशी में भगवान शिव की बारात देखने के लिए हर साल लाखों की संख्या में लोग उमड़ते हैं। यह अनोखी बारात भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रतीक होती है। इसमें शिव जी के गणों की मस्ती, ढोल-नगाड़ों की गूंज और मंत्रोच्चार के बीच शिव विवाह का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

हालांकि इस बार तिथि में बदलाव किया गया है, लेकिन भव्यता में कोई कमी नहीं होगी। 27 फरवरी को काशी की गलियां एक बार फिर से शिव भक्ति में डूब जाएंगी और महादेव की बारात का स्वागत करने के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ेगा।

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