रामनगर के पूछड़ी में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने का अभियान, 525 पुलिसकर्मी तैनात

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रामनगर के पूछड़ी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए सुबह पांच बजे ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया। प्रशासन ने 82 से अधिक चिह्नित निर्माणों पर कार्रवाई के लिए भारी पुलिस बल, पीएसी और मशीनें तैनात की हैं।

रामनगर। नैनीताल जिले के पूछड़ी गांव में वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए शनिवार सुबह प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया। सुबह करीब पांच बजे से बुलडोजर और पोकलैंड मशीनों ने चिह्नित कच्चे-पक्के निर्माणों को हटाना शुरू किया। कार्रवाई के दायरे में करीब 82 मकान बताए जा रहे हैं, जबकि अभियान के पहले चरण में कई परिवारों के निर्माण हटाए जा चुके हैं। मौके की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तीन किलोमीटर के क्षेत्र में आवाजाही सीमित कर दी है। 525 पुलिसकर्मियों और तीन कंपनी पीएसी को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। बताया जा रहा है कि कुछ परिवारों ने कार्रवाई से पहले ही अपना सामान निकाल लिया था। वन विभाग का कहना है कि करीब पांच हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराया जाना है।


14 सेक्टरों में बांटकर शुरू हुई कार्रवाई

अभियान को व्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए पूरे क्षेत्र को सुपर जोन, जोन और 14 सेक्टरों में बांटा गया है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में अलग-अलग स्थानों पर मशीनें पहुंचाई गईं और चिह्नित निर्माणों पर एक साथ कार्रवाई शुरू की गई। सुरक्षा व्यवस्था की कमान वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हाथ में है। जानकारी के मुताबिक मौके पर पांच पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी, छह क्षेत्राधिकारी, 25 निरीक्षक और 82 उपनिरीक्षक तैनात किए गए हैं। 30 से अधिक जेसीबी और कई पोकलैंड मशीनों की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने लोगों से प्रतिबंधित क्षेत्र में अनावश्यक रूप से न आने की अपील की है। किसी भी विरोध या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया गया है।


नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बाद दूसरे चरण की कार्रवाई

पूछड़ी और अपर कोसी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार पहले चरण में 51 परिवारों से जुड़े निर्माण हटाए गए थे। दूसरे चरण में आसपास के 92 निर्माणों को नोटिस जारी किए गए और संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने तथा अपील का अवसर दिया गया। इनमें कुछ मामलों पर अदालत से रोक होने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक जिन निर्माणों पर न्यायिक रोक नहीं है, उन्हीं पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। वन विभाग का दावा है कि यह क्षेत्र आरक्षित वन भूमि के अंतर्गत आता है और लंबे समय से यहां कब्जों को चिह्नित किया गया था। तीसरे चरण में शेष निर्माणों की स्थिति की समीक्षा के बाद नियमों के अनुसार फैसला लिया जाएगा।


परिवारों और स्कूल को लेकर बढ़ी चिंता

कार्रवाई से प्रभावित परिवारों में अपने घर और रोजमर्रा के सामान को लेकर चिंता बनी हुई है। कुछ लोगों ने रात में ही जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया, जबकि कई परिवार प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार करते रहे। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि क्षेत्र में आर्थिक रूप से कमजोर और मजदूर परिवारों के बच्चे जिस सावित्रीबाई ज्योतिबा फुले सायंकालीन विद्यालय में पढ़ते हैं, उसके भवन पर भी असर पड़ सकता है। यह विद्यालय करीब छह वर्षों से संचालित होने और लगभग 200 बच्चों के पढ़ने की बात सामने आई है। प्रशासन का जोर कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने पर है। अधिकारियों के अनुसार अभियान के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और आगे की कार्रवाई अदालत के आदेशों तथा विभागीय नियमों के अनुरूप होगी।

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