दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना को मिली रफ्तार, नोएडा में बनेगा स्टेशन, जेवर एयरपोर्ट भी सीधे हाईस्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ेगा
- Shiv Kumar
- 13 Jun, 2026
दिल्ली से वाराणसी के बीच प्रस्तावित हाईस्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली से आगरा तक के रूट का अलाइनमेंट संबंधित प्राधिकरणों को सौंप दिया है। इसके साथ ही परियोजना के तहत बनने वाले स्टेशनों और ट्रैक की संभावित लोकेशन भी लगभग तय कर ली गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर के बीच यात्रा पहले की तुलना में काफी तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।
परियोजना के तहत पहला स्टेशन दिल्ली के सराय काले खां और हजरत निजामुद्दीन क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसके बाद करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर नोएडा के सेक्टर-98 के पास दूसरा स्टेशन बनाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार नोएडा के बाद लगभग 24 किलोमीटर आगे ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में तीसरे स्टेशन की योजना है। वहीं चौथा स्टेशन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के निकट विकसित किया जाएगा, जिससे एयरपोर्ट और हाईस्पीड रेल नेटवर्क के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो सकेगा।
यमुना और एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा हाईस्पीड रेल कॉरिडोर
प्रस्तावित हाईस्पीड रेल ट्रैक का अधिकांश हिस्सा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना के समानांतर क्षेत्र से होकर गुजरेगा। इससे न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों को भी कम समय में लंबी दूरी तय करने की सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बुलेट ट्रेन परियोजना के शुरू होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर क्षेत्र में निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। फिलहाल संबंधित एजेंसियां अलाइनमेंट को अंतिम रूप देने, भूमि संबंधी प्रक्रियाओं और तकनीकी तैयारियों पर काम कर रही हैं। परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि इससे क्षेत्र का बुनियादी ढांचा और अधिक मजबूत होगा।
पुश्ता एलिवेटेड रोड परियोजना को भी मिलेगा फायदा
इसी बीच नोएडा एक्सप्रेसवे के समानांतर प्रस्तावित पुश्ता से सेक्टर-150 तक एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस परियोजना का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक हाईस्पीड रेल और एलिवेटेड कॉरिडोर के रूट अलग-अलग होंगे, लेकिन दोनों परियोजनाएं एक-दूसरे के लिए सहायक साबित होंगी। सलाहकार कंपनी ने हाईस्पीड रेल ट्रैक का डिजाइन भी मांगा था, जिसे प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध करा दिया गया है। इसी आधार पर एलिवेटेड कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और डिजाइन को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
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