हाथ और पैरों की नसों में क्यों होता है दर्द व ऐंठन, क्या है इसकी वजह, कैसे करें ठीक, जानें सबकुछ यहां
- Shiv Kumar
- 26 Mar, 2026
अक्सर लोगों को हाथ-पैरों में अचानक दर्द और ऐंठन महसूस होती है, जिसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, यह समस्या कई बार शरीर में पोषक तत्वों की कमी या तंत्रिका तंत्र से जुड़ी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकती है। मांसपेशियों में ऐंठन को फैसीकुलेशन भी कहा जाता है, जिसमें मांसपेशियां अचानक सिकुड़ जाती हैं। यह समस्या कभी-कभी हल्की होती है, लेकिन बार-बार होने पर गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए जरूरी है कि इसके कारणों को समझकर समय रहते सही कदम उठाए जाएं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह ली जाए।
पोषक तत्वों की कमी और डिहाइड्रेशन बड़ा कारण
हाथ-पैरों में ऐंठन का एक मुख्य कारण शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी है। खासतौर पर विटामिन डी, कैल्शियम और विटामिन बी12 की कमी से मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द होने लगता है। इसके अलावा शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी इस समस्या को बढ़ा देता है। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता, तो मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पातीं और उनमें ऐंठन होने लगती है। यह समस्या पिंडलियों, हाथों और आंखों की पलकों तक में महसूस हो सकती है। इसलिए संतुलित आहार और पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है।
कैफीन, धूम्रपान और तनाव भी जिम्मेदार
ज्यादा कैफीन का सेवन और धूम्रपान भी मांसपेशियों में ऐंठन का कारण बन सकते हैं। सिगरेट और तंबाकू में मौजूद निकोटीन मांसपेशियों पर नकारात्मक असर डालता है, जिससे दर्द और ऐंठन बढ़ सकती है। वहीं, अत्यधिक तनाव भी नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है, जिससे शरीर की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं। लगातार तनाव में रहने वाले लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है। इसके अलावा ज्यादा शारीरिक गतिविधि या एक्सरसाइज के बाद मांसपेशियों में लैक्टिक एसिड जमा हो जाता है, जिससे दर्द और ऐंठन महसूस हो सकती है।
ऐंठन से राहत के लिए अपनाएं ये उपाय
इस समस्या से बचने के लिए सबसे जरूरी है संतुलित और पौष्टिक आहार लेना। अपनी डाइट में ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन शामिल करें। रोजाना 8 से 10 गिलास पानी पीना शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। साथ ही पर्याप्त नींद लेना और नियमित हल्का व्यायाम करना भी जरूरी है। कैफीन का सेवन सीमित रखें और धूम्रपान से दूरी बनाएं। तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान का सहारा लिया जा सकता है। यदि समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
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