भूलने की बीमारी पर WHO की चेतावनी, बढ़ती उम्र ही नहीं ये कारण भी बढ़ा सकते हैं जोखिम, समय रहते रहें सतर्क

top-news
WHO की नई गाइडलाइन में वायु प्रदूषण को डिमेंशिया के जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। पीएम2.5 जैसे प्रदूषक कण मस्तिष्क की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञ स्वस्थ जीवनशैली, नियमित गतिविधि और रक्तचाप-शुगर नियंत्रण के साथ प्रदूषण से बचाव की सलाह देते हैं।

क्या कभी आप किसी कमरे में किसी काम से गए और वहां पहुंचते ही भूल गए कि क्यों आए थे? या किसी परिचित का नाम अचानक याद नहीं आया? ऐसी छोटी-छोटी भूल कई बार सामान्य लग सकती हैं, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बढ़ रही है तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा बढ़ता है, लेकिन अब विशेषज्ञों का ध्यान उन कारणों पर भी है जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जुलाई 2026 में डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए अपनी नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें पहली बार वायु प्रदूषण के संपर्क को कम करने की सिफारिश भी शामिल की गई है। WHO के मुताबिक दुनिया में 5.7 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया के साथ रह रहे हैं और हर साल करीब एक करोड़ नए मामले सामने आते हैं।


पीएम2.5 से दिमाग पर भी पड़ सकता है असर

वायु प्रदूषण का असर केवल फेफड़ों और दिल तक सीमित नहीं माना जा रहा है। खास तौर पर पीएम2.5 जैसे बेहद महीन कण शरीर में प्रवेश कर स्वास्थ्य पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं। WHO के अनुसार उभरते वैज्ञानिक प्रमाण वायु प्रदूषण को संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट और डिमेंशिया से भी जोड़ते हैं। पीएम2.5 के कण बेहद छोटे होते हैं और लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से शरीर में सूजन और अन्य जैविक प्रभाव पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण के संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को डिमेंशिया होगा। यह बीमारी कई अलग-अलग जोखिम कारकों के संयुक्त प्रभाव से जुड़ी होती है।


डिमेंशिया सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं

डिमेंशिया को केवल चीजें भूलने की समस्या समझना सही नहीं है। यह मस्तिष्क से जुड़ी ऐसी स्थिति है जो याददाश्त के साथ सोचने-समझने, निर्णय लेने, भाषा और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है। शुरुआती दौर में किसी काम को भूल जाना, बातचीत में सही शब्द खोजने में परेशानी या परिचित कामों में असामान्य दिक्कत जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। WHO की नई गाइडलाइन के मुताबिक डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े कई पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। इनमें नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान छोड़ना, शराब का सेवन कम करना, स्वस्थ आहार, सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी और उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी स्थितियों का बेहतर प्रबंधन शामिल है।


45 प्रतिशत जोखिम को नियंत्रित किया जा सकता है

WHO के अनुसार डिमेंशिया के जोखिम का 45 प्रतिशत तक हिस्सा ऐसे कारकों से जुड़ा हो सकता है जिन्हें बदला या नियंत्रित किया जा सकता है। इनमें वायु प्रदूषण के अलावा धूम्रपान, शराब का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, सामाजिक अलगाव, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे कारक शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि डिमेंशिया के जोखिम को कम करने के लिए कम उम्र से ही स्वस्थ आदतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है। भारत जैसे देशों में वायु प्रदूषण को लेकर यह जानकारी खास महत्व रखती है। ऐसे में प्रदूषित हवा से बचाव, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और रक्तचाप-शुगर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं को नियंत्रित रखना मस्तिष्क की सेहत के लिए भी उपयोगी कदम हो सकते हैं। अगर याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमता में लगातार बदलाव महसूस हो रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *