ड्राई आइज से परेशान हैं? आंखों में लालिमा और जलन के पीछे कम पानी पीना कितना जिम्मेदार है, जानें सबकुछ यहां
- Shiv Kumar
- 09 Oct, 2026
हेल्थ डेस्क। आंखों में बार-बार जलन, चुभन, लालिमा या किरकिरापन महसूस होना ऐसी परेशानी है, जिसे कई लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कभी-कभी ऐसा भी लगता है, जैसे आंख में कुछ चला गया हो, जबकि बाहर धूल और धुएं के संपर्क में आने की बात भी नहीं होती। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ये लक्षण ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन होने का संकेत हो सकते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में यह समस्या देखने को मिल सकती है। मोबाइल और कंप्यूटर का बढ़ता इस्तेमाल इसकी एक वजह है, लेकिन आंखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित होने के पीछे कई दूसरी आदतें और परिस्थितियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। ऐसे में समस्या के कारणों को समझना और समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है।
आंखों में सूखापन क्यों होने लगता है?
आंखों को नम बनाए रखने के लिए आंसुओं की एक पतली परत जरूरी होती है। जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या यह परत जल्दी सूखने लगती है, तो ड्राई आई की समस्या हो सकती है। इससे आंखों में जलन, चुभन, किरकिरापन, थकान और कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कई लोग आंखों के सूखेपन को केवल शरीर में पानी की कमी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसके पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं। स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताना, पलकों का कम झपकना, शुष्क वातावरण और कुछ दवाओं का इस्तेमाल भी आंखों की नमी को प्रभावित कर सकता है।
मोबाइल-कंप्यूटर देखते समय कम झपकती हैं पलकें
लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों पर असर पड़ सकता है। स्क्रीन देखते समय हमारा ध्यान इतना केंद्रित रहता है कि पलकों का झपकना कम हो जाता है। सामान्य रूप से पलक झपकाने पर आंसुओं की परत आंखों की सतह पर फैलती रहती है, जिससे आंखों में नमी बनी रहती है। जब पलकें कम झपकती हैं, तो यह परत जल्दी टूट सकती है। इसके बाद आंखों में जलन, चुभन, किरकिरापन, थकान और अस्थायी धुंधलेपन की परेशानी हो सकती है। इसलिए स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में विराम लेना और पलकें झपकाने का ध्यान रखना उपयोगी हो सकता है।
एसी-पंखे की सीधी हवा और धूल-धुआं भी बन सकते हैं वजह
आंखों में सूखापन केवल मोबाइल के इस्तेमाल से नहीं होता। एसी या पंखे की हवा सीधे चेहरे पर पड़ने से आंखों की सतह की नमी जल्दी कम हो सकती है। कम नमी वाले कमरे में लंबे समय तक रहने पर भी परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा धूल, धुआं और वायु प्रदूषण आंखों में जलन, लालिमा, चुभन और पानी आने की समस्या पैदा कर सकते हैं। बचाव के लिए एसी या पंखे की हवा सीधे आंखों पर पड़ने से रोकें और धूल-धुएं के संपर्क को कम करने की कोशिश करें।
कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले भी रहें सतर्क
कॉन्टैक्ट लेंस का लंबे समय तक इस्तेमाल करने या उनकी साफ-सफाई में लापरवाही बरतने से भी आंखों में परेशानी हो सकती है। लेंस को निर्धारित समय से ज्यादा देर तक पहनना आंखों की सतह पर असर डाल सकता है। इसके अलावा उम्र बढ़ने, कुछ दवाओं, हार्मोनल बदलाव और आंखों से जुड़ी अन्य समस्याओं के कारण भी ड्राई आई की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल निर्देशों के अनुसार करें और लगातार परेशानी होने पर आंखों के विशेषज्ञ से सलाह लें।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
कभी-कभार आंखों में सूखापन महसूस होना और लगातार लक्षण बने रहना अलग-अलग स्थितियां हैं। अगर जलन, चुभन या किरकिरापन बार-बार हो रहा है अथवा लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। आंखों में तेज दर्द, अधिक लालिमा, रोशनी से परेशानी या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। कुछ मामलों में आदतों में बदलाव से राहत मिल सकती है, जबकि अन्य में चिकित्सकीय उपचार की जरूरत होती है। बिना डॉक्टर की सलाह के खुद से आई ड्रॉप का इस्तेमाल करने से बचें।
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