काम की बात: बेहतर ब्रेन हेल्थ के लिए महंगे सप्लीमेंट से ज्यादा जरूरी हो सकती है आपकी यह आदत
- Shiv Kumar
- 19 Oct, 2026
आज की व्यस्त दिनचर्या में लोग अक्सर पर्याप्त नींद लेने पर ध्यान नहीं देते। देर रात तक मोबाइल चलाना, सोशल मीडिया पर रील्स देखना, ऑनलाइन गेम खेलना और काम का दबाव नींद के समय को कम कर सकता है। इसका असर केवल थकान या सुस्ती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि याददाश्त, एकाग्रता, भावनात्मक स्वास्थ्य और रोजमर्रा के कामकाज पर भी पड़ सकता है। नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर सीखी गई जानकारी को व्यवस्थित करने और याददाश्त मजबूत बनाने में मदद करता है। आमतौर पर वयस्कों के लिए हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है।
याददाश्त और एकाग्रता पर पड़ सकता है असर
पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर मस्तिष्क की नई जानकारी सीखने, उसे याद रखने और जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और कामकाजी लोगों की कार्यक्षमता पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में किसी काम पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो सकता है और छोटी-छोटी बातें भूलने की समस्या बढ़ सकती है। नींद की कमी के कारण जानकारी को समझने और सही समय पर उसका इस्तेमाल करने में भी परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक नींद पूरी नहीं होने पर दैनिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
तनाव बढ़ने के साथ निर्णय लेने की क्षमता भी हो सकती है प्रभावित
नींद की गड़बड़ी का संबंध मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी है। पर्याप्त आराम न मिलने पर चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव महसूस हो सकता है। वहीं, लगातार नींद की कमी रहने से पहले से मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे लोगों की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। इसके अलावा, मस्तिष्क के सोचने, योजना बनाने और निर्णय लेने से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं। नींद पूरी न होने पर प्रतिक्रिया देने में अधिक समय लग सकता है और गलतियां होने की आशंका बढ़ सकती है। इसका असर काम की गुणवत्ता और दिनभर की उत्पादकता पर भी पड़ सकता है।
बच्चों और किशोरों के लिए क्यों जरूरी है पूरी नींद?
बचपन और किशोरावस्था में मस्तिष्क का विकास जारी रहता है, इसलिए इस दौरान पर्याप्त नींद लेना विशेष रूप से जरूरी है। अच्छी नींद सीखने, याददाश्त मजबूत करने और भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है। नींद की कमी होने पर बच्चों को पढ़ाई में ध्यान लगाने, निर्देशों को समझने और अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखने में कठिनाई हो सकती है। बेहतर नींद की आदत विकसित करने के लिए रोजाना सोने और जागने का समय तय रखना चाहिए। सोने से 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन से दूरी बनाएं। शाम को चाय-कॉफी जैसे कैफीन युक्त पेय कम लें और सोने के कमरे को शांत, अंधेरा व आरामदायक रखें। नियमित व्यायाम और पर्याप्त आराम भी स्वस्थ नींद की दिनचर्या बनाने में सहायक हो सकते हैं।
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