खाने में नखरे करता है बच्चा तो अपनाएं ये आसान तरीके, बिना जिद के खाना खाने में मिलेगी मदद

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बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाना कई माता-पिता के लिए चुनौती बन जाता है। रंगीन प्लेट, आकर्षक आकार और घर पर बने हेल्दी स्नैक्स से खाने में उनकी रुचि बढ़ाई जा सकती है। लगातार कम खाने या ग्रोथ प्रभावित होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।

छोटे बच्चों को भरपेट और पौष्टिक भोजन खिलाना माता-पिता के लिए अक्सर चुनौती बन जाता है। कई बार बच्चे खाना देखकर मुंह फेर लेते हैं, तो कभी अपनी पसंद की चीजें खाने की जिद करते हैं। ऐसे में माता-पिता को समझ नहीं आता कि बच्चे की डाइट कैसे पूरी की जाए। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर बार कम खाना किसी समस्या का संकेत नहीं होता। बच्चों की भूख उम्र, गतिविधियों और दिनचर्या के अनुसार बदल सकती है। हालांकि, अगर बच्चा लगातार कम खा रहा है या उसकी लंबाई और वजन की बढ़त ठीक से नहीं हो रही है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। खाने के समय दबाव बनाने के बजाय भोजन को आकर्षक बनाना, पौष्टिक विकल्प देना और नियमित दिनचर्या अपनाना मददगार हो सकता है।


रंग-बिरंगी प्लेट से बढ़ाएं खाने में दिलचस्पी

छोटे बच्चों को रंग आकर्षित करते हैं। ऐसे में उनकी प्लेट में अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां शामिल करने से भोजन देखने में दिलचस्प बन सकता है। लाल टमाटर, हरी पालक, पीली सामग्री के रूप में केला, नारंगी गाजर और बैंगनी चुकंदर जैसे विकल्पों से प्लेट सजाई जा सकती है। इन खाद्य पदार्थों से बच्चों को अलग-अलग विटामिन, मिनरल और फाइबर मिलते हैं। गाजर, खीरा, टमाटर, केला, चुकंदर और मौसमी फलों को छोटे टुकड़ों में काटकर इंद्रधनुष या स्माइली के आकार में सजाया जा सकता है। इससे बच्चे को नए खाद्य पदार्थ देखने और चखने का मौका मिलता है। ध्यान रखें कि केवल रंगीन प्लेट ही पर्याप्त नहीं है। भोजन बच्चे की उम्र के अनुकूल हो और फल-सब्जियों के टुकड़े ऐसे हों, जिन्हें वह सुरक्षित तरीके से खा सके।


खाने को मजेदार आकार देकर करें पेश

बच्चे कई बार भोजन का स्वाद चखने से पहले उसकी बनावट और दिखावट पर ध्यान देते हैं। ऐसे में रोजमर्रा के खाने को थोड़ा रचनात्मक बनाकर पेश किया जा सकता है। रोटी को स्टार, हार्ट या त्रिकोण के आकार में काटें। सैंडविच पर सब्जियों की मदद से आंखें और मुस्कान बनाकर उसे आकर्षक रूप दें। इसी तरह खाने की प्लेट में अलग-अलग चीजों को सुंदर तरीके से सजाया जा सकता है। इससे बच्चे की भोजन में दिलचस्पी बढ़ सकती है और वह नए विकल्प चखने के लिए तैयार हो सकता है। हालांकि, बच्चे को हर बार पूरी प्लेट खत्म करने के लिए मजबूर न करें। उसे अपनी भूख के संकेत समझने का मौका दें और नए भोजन को स्वीकार करने के लिए समय दें। खाने के दौरान शांत माहौल रखना भी उपयोगी हो सकता है।


पैकेज्ड स्नैक्स के बजाय दें पौष्टिक विकल्प

बच्चों को दिन में अलग-अलग समय पर भूख लगना सामान्य है। ऐसी स्थिति में कई माता-पिता चिप्स, बिस्किट या दूसरे पैकेज्ड स्नैक्स दे देते हैं। इनके बजाय घर पर तैयार पौष्टिक विकल्प चुने जा सकते हैं। मूंगदाल का चीला, ओट्स उत्तपम, भुने चने, मखाने, फल, दही और घर का बना दलिया बच्चों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। स्नैक्स की मात्रा का ध्यान रखना भी जरूरी है, ताकि बच्चा मुख्य भोजन के समय भूखा रहे। खाने का एक नियमित समय तय करें और भोजन के बीच बार-बार कुछ खिलाने से बचें। बच्चे की पसंद को समझते हुए अलग-अलग पौष्टिक चीजें पेश करें, लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ को खाने के लिए दबाव न बनाएं। यदि बच्चा लंबे समय तक बहुत कम खाता है, वजन नहीं बढ़ रहा है या उसकी ग्रोथ को लेकर चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होगा।

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