भारत में एप्पल गैजेट्स हुए महंगे, लेकिन iPhone की कीमत में बदलाव नहीं, आखिर क्या है वजह?
- Shiv Kumar
- 26 Jun, 2026
अगर आप एप्पल का नया मैकबुक, iPad या होमपॉड खरीदने की योजना बना रहे हैं तो अब आपको पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। कंपनी ने भारत समेत कई देशों में अपने कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे टेक बाजार में हलचल तेज हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि iPhone की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि मेमोरी चिप्स की बढ़ती लागत और ग्लोबल सप्लाई प्रेशर के चलते यह फैसला लेना पड़ा है। वहीं एक्सपर्ट्स का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग का सीधा असर अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर दिखने लगा है। कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में 15% से लेकर 45% तक का इजाफा देखा गया है, जिससे ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
मेमोरी चिप्स की कमी और AI बूम बना बड़ी वजह
कंपनी के मुताबिक मेमोरी चिप्स की लगातार बढ़ती कीमतें इस फैसले की मुख्य वजह हैं। एप्पल के सीईओ टिम कुक ने पहले ही संकेत दिया था कि सप्लाई चेन में अस्थिरता के कारण कुछ प्रोडक्ट्स महंगे हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार दुनियाभर में AI डेटा सेंटर्स के विस्तार के चलते एडवांस्ड मेमोरी चिप्स की भारी मांग बढ़ गई है। इसके कारण सप्लायर्स अब कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के बजाय हाई-मार्जिन AI प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। नतीजतन DRAM और NAND फ्लैश जैसी चिप्स की कीमतें तेजी से बढ़ीं और इसका सीधा असर मैकबुक और iPad जैसे डिवाइस पर पड़ा।
MacBook और iPad की कीमतों में बड़ा उछाल
नई कीमतों के अनुसार MacBook लाइनअप में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मैकबुक प्रो के बेस मॉडल की कीमत में लगभग 50 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि मैकबुक एयर (512GB) भी अब पहले से महंगा हो गया है। वहीं iPad सेगमेंट में 11-इंच iPad Air की कीमत करीब 30% तक बढ़ गई है और iPad Pro भी अब ज्यादा कीमत पर उपलब्ध है। होमपॉड मिनी और होमपॉड की कीमतों में भी 40% से ज्यादा का इजाफा हुआ है। इससे साफ है कि Apple ने अपने प्रीमियम डिवाइस सेगमेंट में बड़ा प्राइस रीसेट किया है।
iPhone की कीमतें स्थिर, लेकिन बाजार पर नजर
हालांकि एप्पल ने iPhone की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी ने जानबूझकर iPhone को इससे अलग रखा है क्योंकि यह उसका सबसे बड़ा रेवेन्यू सोर्स है। कीमत बढ़ाने से बिक्री पर असर पड़ सकता था, इसलिए कंपनी ने फिलहाल इसे स्थिर रखा है। लेकिन टेक इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि अगर मेमोरी चिप्स की कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी अपने डिवाइस महंगे कर सकती हैं।
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